Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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स्तवनमाळा ][ २०५
विदेही धर्मध्वज फरके मारे आंगणे रे,
ए तो गगने अडी अडी जाय....मारे....८
विदेहीनाथ वस्या छे गुरुजी अंतरे रे,
क्षेत्र विदेह उतार्युं भारत देश....मारे....९
विदेही मानस्तंभ पधराव्या सुवर्ण शहेरे रे,
इन्द्रो आवो कल्याणिक महोत्सवे रे,....मारे
बोलो सहु मळी जय जयकार....मारे....१०
श्री सीमंधार जिनस्तवन
(राग भरथरी)
श्री सीमंधर प्रभु तणो, अद्भुत सहजानंद;
गुण इक विध त्रिक परिणम्यो, अनंत गुणनो रे वृंद.
सीमंधर जिन साहिबा०
निज रम्ये रमण करो, चारित्र रमता राम;
भोग अनंतने भोगवो, भोग विण भोक्तानाथ. सी०
देय दान नित दीजते, दाता प्रभु स्वयमेव;
पात्र तुमे निज शक्तिना, ग्राहक व्यापक देव. सी०
पारिणामिक सत्ता तणो, आविर्भाव विलास;
सहज अकृत्रिम अपराश्रये, निर्विकल्प निःप्रयास. सी०
प्रगट तत्त्वता ध्यावतां, निजनो ध्याता थाय;
तत्त्वरमण एकाग्रता, पूरण तत्त्वे समाय. सी०