Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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स्तवनमाळा ][ २०७
त्रिभुवननाथ दयाळ सीमंधरनाथ जो,
करुणा करी सेवकने साथे राखजो रे लोल.
श्री सीमंधार जिनस्तवन
(रागभरथरी)
श्री सीमंधर जिन वंदता, उल्लसित तन मन थाय,
वदन अनुपम नीरखता, भव भवना दुःख जाय.
जगद्गुरु जिन जागतो
निशदिन सूतां जागतां, हीयडाथी न रहे दूर;
जब उपकार संभारीये, उपजे आनंद पूर.जगत०
प्रभु उपकार गुणे भर्या, अवगुण एक न समाय,
गुण गण अनुबंधी हुआ, अक्षयभाव कहाय.जगत०
अक्षयपद अनुपम अहो, प्रभुने अनुभवरूप,
अक्षर स्वर गोचर नहीं, ए तो अकल अमाय.जगत०
अक्षर थोडा गुण घणा, सज्जनता न लखाय,
प्रभु चरणे रही रंगथी आतममां परखाय.जगत०
श्री सीमंधार जिनस्तवन
( आवेल आशाभर्याराग)
सीमंधर जिणंद सम्यक् दातार,
सम्यक् अमृतरसधार रेजिनराज भेट्या आजे रे.
सम्यक् सम्यक् जिन कारण स्वामी,
सम्यक् केवलपद पामी रे. जिनराज०