Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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श्री सीमंधार जिनस्तवन
(रागभरथरी)
धन्य दिवस धन्य आजनो,
धन धन घडी तेह;
धन्य समय प्रभु माहरो, दरिशण दीठुं आज;
मन लाग्युं रे मारा नाथजी
सुंदर मूरत दीठी ताहरी, केटले दिवसे आज;
नयन पावन थया माहरा, पापतिमिर गया भाज
मन०
साचो भक्त जाणीने, करुणा धरो मनमांह्य,
सेवक पर हित आणीने, धरी हृदय उमाह
मन०
निर्मळ सेवा आपीए, भवना बुझेरे ताप,
हवे दरिशण विरह मत करो, मेटो मननो संताप
मन०
घणुं घणुं शुं कहीए तुमने, तुमे चतुर सुजाण,
मुज मनवांछित पूरजो, व्हाला सीमंधरनाथ
मन०
मानस्तंभ स्तवन
(छंद त्रिभंगी)
दिशि चारि सुहावन अतिही पावन मन हुलासन जान कही,
लखि मानस्तंभा होत अचम्भा तह जिनबिंबा पूज चही;
सुरपति सुर हूजे जिनपद पूजे आनंद हूजे मोद लही,
खग नर मुनि आवैं पूज रचावैं जिनगुण गावैं दास तही.
२१४ ][ श्री जिनेन्द्र