Shri Jinendra Stavan Mala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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(छन्द पद्धरी)
जै मानस्तंभ कह्यो बखान,
तिन नमन करौं जुग जोरि पान,
है ताको वर्णन अति विशाल,
जिहि सुनत कालिमा जात काल.
जै पहिली गलि के बीच मांहि,
दरवाजे चारि तहां बताहि;
तहं तीन कोट कीन्हें बखान,
तिन पाहि ध्वजा लहरैं महान.
पहिला दूजा शुभ कोट जान,
सुन कोट तीसरे का बयान;
है कोट बीच में भूमि थान,
तहां बने सु वन शोभायमान.
तिनमें पिक कोकिल रहे अलाप,
जिन शब्द सुनत छूटें कलाप;
तहं लोकपाल के नगर जान,
रमणीक महा शोभायमान.
आभ्यंतर तीजे कोट जान,
तहां तीन पीठ कीन्हीं बखान;
सो त्रै कटनीयुत शोभकार,
वैडूर्य मणिनकी कांति धार.
स्तवनमाळा ][ २१५