Shri Jinendra Stavan Manjari-Gujarati (Devanagari transliteration).

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निस्सहाय निर्म्मम नीरागी, सुधारूप सुपथग सौभागी;
हतकैतवी मुक्तसंतापी, सहजस्वरूपी सबविधि व्यापी. ६५
महाकौतुकी महद विज्ञानी, कपटविदारन करुणादानी,
परदारन परमारथकारी, परमपौरुषी पापप्रहारी. ६६
केवलब्रह्म धरमधनधारी, हतविभाव हतदोष हँतारी;
भविकदिवाकर मुनिमृगराजा, दयासिंधु भवसिंधु जहाजा. ६७
शंभु सर्वदर्शी शिवपंथी, निराबाध निःसंग निर्ग्रन्थी;
यती यंत्रदाहक हितकारी, महामोहबारन बलधारी. ६८
चित्री चित्रगुप्त चिदवेदी, श्रीकारी संसार उछेदी;
चितसन्तानी चेतनवंशी, परमाचारी भरमविध्वंशी. ६९
सदाचरण स्वशरण शिवगामी, बहुदेशी अनंत परिणामी;
वितथभूमिदारन हलपानी, भ्रमवारिजवनदहन हिमानी. ७०
चारु चिदंकित द्धन्दातीती, दुर्गरूप दुर्ल्लभ दुर्जीती;
शुभकारण शुभकर शुभमंत्री जगतारन ज्योतीश्वर जंत्री. ७१
(दोहा)
जिनपुङ्गल जिनकेहरी, ज्योतिरूप जगदीश;
मुक्ति मुकुन्द महेश हर, महदानंद मुनीश. ७३
(मंगलकमला)
दुरितदलन सुखकन्द, हतभीत अतीत अमन्द;
शीलशरण हतकोप, अनभंग अनंग अलोप. ७३
१२४ ][ श्री जिनेन्द्र