Shri Jinendra Stavan Manjari-Gujarati (Devanagari transliteration).

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उत्पत्ति-व्यय-ध्रुववान, त्रिपदी त्रिपुंज त्रिविधान;
जगजीत जगदाधार, करुणागृह विपत्तिविदार. ८२
जगसाक्षी वरवीर गुणगेह महागंभीर;
अभिनंदन अभिराम, परमेयी परमोद्दाम. ८३
(दोहा)
सगुण विभूती वैभवी सेमुषीश संबुद्ध;
सकल विश्वकर्मा अभव, विश्वविलोचन शुद्ध. ८४
(मंगलकमला)
शिवनायक शिव एव, प्रबलेश प्रजापति देव;
मुदित महोदय मूल, अनुकम्पा सिंधु अकूल. ८५
नीरोपम गतपंक, नीरीहत निर्गतशंक;
नित्य निरामय भौन, नीरन्ध्र निराकुल गौन. ८६
परम-धर्मरथसारथी, धृत केवलरूप कृतारथी;
परम वित्त भंडार, संवरमय संयमधार. ८७
शुभी सरवगत संत, शुद्धोधन शुद्ध सिद्धंत,
नैयायक नयजान, अविगत अनंत अभिधान. ८८
कर्मनिर्जरामूल, अघभंजन सुखद अमूल,
अद्भुत रूप अशेष, अवगमनिधि अवगमभेष. ८९
१ गतपंक = पापरहित
१२६ ][ श्री जिनेन्द्र