बहुगुण-रत्नकरंड, ब्रह्मांड-रमण-ब्रह्मंड;
वरद बंधु भरतार, महदंग महानेतार. ९०
गतप्रमाद गतपास, नरनाथ निराथ निरास;
महामंत्र महास्वामी, महदर्थ महागति-गामि. ९१
महानाथ महजान, महपावन महानिधान,
गुणागार गुणवास, गुणमेरु गंभीर विलास. ९२
करुणामूल निरंग, महदासन महारसंग;
लोकबन्धु हरिकेश, महदीश्वर महदादेश. ९३
महाविभु महधववंत धरणीधर धरणीकंत;
कृपावंत कलिग्राम, कारणमय करनविराम. ९४
मायावेलि गयन्द, सम्मोहतिमिरहर-चन्द;
कुमति निकन्दन काज, दुखगजभंजन-मृगराज. ९५
परमतत्त्वसत संपदा, त्रिगुणी त्रिकालदर्शी सदा;
कोपदवानल नीर, मदनीरदहरण समीर. ९६
भवकांतार-कुठार संशयमृणालअसिधार;
लोभशिखरनिर्घात विपदानिशिहरणप्रभात. ९७
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स्तवन मंजरी ][ १२७