Shri Jinendra Stavan Manjari-Gujarati (Devanagari transliteration).

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(दोहा)
संवररूपी शिवरमण, श्रीपति शीलनिकाय;
महादेव मनमथमथन, सुखमय सुखसमुदाय. ९८
(उपसंहार)
इति श्री सहस-अठोतरी, नाममालिका मूल;
अधिक कसर पुनरुक्ति की, कविप्रमादकी भूल. ९९
परमपिंड ब्रह्मांडमें, लोकशिखर निवसंत;
निरखि नृत्य नानारसी, बानारसी नमंत. १००
महिमा ब्रह्मविलासकी, मोपर कही न जाय;
यथाशक्ति कछु वरणई, नामकथन गुणगाय. १०१
संवत सोलहसो निवे, श्रावण सुदि आदित्य;
करनक्षत्र तिथि पंचमी, प्रगट्यो नाम कवित्त. १०२
❊ ❊ ❊
प्रभु महिमा
(रागभुजंगी)
अहो! योग महिमा जगन्नाथ केरो,
टलें पंच कल्याणक जग अंधेरो;
तदा नारकी जीव पण सुख पावे,
चरण सेववा धसमस्या देव आवे.
१२८ ][ श्री जिनेन्द्र