Shri Jinendra Stavan Manjari-Gujarati (Devanagari transliteration).

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हृदय सरिता में रह्यो,
सुरभि सम हो लही तास विज्ञान..के...अ० १
कीट ध्यान भृंगी तणो,
नित धरता हो ते भृंगी निदान.....के
ले कलधौत स्वरूपता,
लोह फरसत हो पारस पाखान....के....अ० २
+पीचुमंदादिक सही,
होय चंदन हो मलयाचळ संग.....के
सैंधव क्यारीमें पड्या,
जिम पलटे हो वस्तुनो रंग.....के.....अ० ३
ध्येयरूपनी एकता,
करे ध्याता हो धरे ध्यान सुजान....के...
करे कतक मळभिन्नता,
जिम नासे हो तम उगते भान.....के.....अ० ४
पुष्टालंबन योगथी,
निरालंबता हो सुख साधन जेह.....के....
चिदानंद अविचळ कळा,
क्षणमांहे हो भवि पावे तेह.....के....अ० ५
सोनुं. + लींबडो वगेरे.
१३६ ][ श्री जिनेन्द्र