Shri Jinendra Stavan Manjari-Gujarati (Devanagari transliteration).

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श्री नेमिनाथ जिनस्तवन
(अजित जिणंदशुं प्रीतडीए राग)
परमातम पूरण कळा,
पूरण गुण हो पूरण जन-आश.....के
पूरण द्रष्टि निहाळीए;
चित्त धरीए हो अमची अरदास...के....प० (१)
सर्वदेशघाति सहु,
अघाति हो करी घात दयाळ.....के
वास कीयो शिवमंदिरे,
मोहे विसरी हो भमतो जगजाळ...के...प० (२)
जगतारक पदवी लही,
तार्या सही हो अपराधी अपार.....के
तातें कहो मोहे तारतां,
किम कीनी हो इण अवसर वार.....के....प० (३)
मोह महामद छाकथी,
हुं छकियो हे आव्यो तुम पास.....के
उचित सही इणे अवसरे,
सेवकनी हो करवी संभाळ....के....प० (४)
मोह गयां जो तारशो,
तिणवेळा हो कहा तुम उपकार........के
स्तवन मंजरी ][ १३७