Shri Jinendra Stavan Manjari-Gujarati (Devanagari transliteration).

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सुखवेळा सज्जन घणा,
दुःखवेळा हो विरला संसार.....के......प० (५)
पण तुम दरिसन जोगथी,
थयो हृदये हो अनुभव परकाश....के
अनुभव अभ्यासी करे,
दुःखदायी हो सहु कर्म विनाश.....के.....प० (६)
कर्म कलंक निवारीने,
निजरूपे हो रमे रमता राम....के
लहत अपूरव भावथी,
इण रीते हो तुम पद विश्राम.....के......प० (७)
त्रिकरण जोगे विनवुं,
सुखदायी हो शिवादेवीनंद......के
चिदानंद मनमें सदा,
तुम आवो हो प्रभु नाणदिणंद....के.....प० (८)
श्री सीमंधर जिनस्तवन
(ललना राग)
जगतगुरु जिन माहरो, जगदीपक जिनराय लालरे;
शांति सुधारस ध्यानमां, आतम अनुभव आय लालरे.
जगत०
१३८ ][ श्री जिनेन्द्र