लोकानुप्रेक्षा ]
अर्थः — वस्तु जे काळे जे स्वभावे परिणमनरूप होय छे ते काळे ते परिणामथी तन्मय होय छे; तेथी ते ज परिणामरूप (वस्तुने) साधे – कहे ते एवंभूतनय छे. आ नय परमार्थरूप छे.
भावार्थः — जे धर्मनी मुख्यताथी वस्तुनुं जे नाम होय ते ज अर्थना परिणमनरूप जे काळे (वस्तु) परिणमे तेने ते ज नामथी कहे ते एवंभूतनय छे, तेने निश्चय (नय) पण कहेवामां आवे छे. जेम ‘गौ’ने चाले त्यारे ज गाय कहे पण अन्य काळे न कहे.
हवे नयोना कथनने संकोचे छेः —
अर्थः — जे पुरुष आ प्रमाणे नयोथी वस्तुने व्यवहाररूप कहे छे – साधे छे – प्रवर्तावे छे ते पुरुष दर्शन-ज्ञान-चारित्रने साधे छे तथा स्वर्ग-मोक्षने साधे छे.
भावार्थः — प्रमाण-नयथी वस्तुनुं स्वरूप यथार्थ सधाय छे. जे पुरुष प्रमाण-नयोनुं स्वरूप जाणी वस्तुने यथार्थ व्यवहाररूप प्रवर्तावे छे तेने सम्यग्दर्शन-ज्ञान-चारित्रनी तथा तेना फळरूप स्वर्ग-मोक्षनी सिद्धि थाय छे.
हवे कहे छे के तत्त्वार्थनुं श्रवण, ज्ञान, धारण अने भावना करवावाळा विरला छेः —