मननी चंचळताथी थाय छे, ते (ना)थी रागादि समस्त दोषो थाय छे,
तेनाथी संक्लेश थाय छे, तेनाथी विशुद्धता नाश पामे छे, विशुद्धता विना
आत्मस्वरूपनुं चिंतन थाय नहि अने आत्मचिंतन विना परम अखिल
कर्मथी छूटवारूप मुक्ति थती नथी. १८-१९-२०.
Tattvagyan Tarangini-Gujarati (Devanagari transliteration).
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