Tattvagyan Tarangini-Gujarati (Devanagari transliteration).

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१३६ ][ तत्त्वज्ञान-तरंगिणी
तस्माद्विविक्तसुस्थानं ज्ञेयं क्लेशनाशनं
मुमुक्षुयोगिनां मुक्तेः कारणं भववारणं ।।२१।।
अर्थ :एकांत स्थानकना अभावथी योगीओने मनुष्योनो संग
थाय, (तेथी) तेमने जोवाथी, (तेमनां) वचनोथी तथा स्मरणथी तथा
मननी चंचळताथी थाय छे, ते (ना)थी रागादि समस्त दोषो थाय छे,
तेनाथी संक्लेश थाय छे, तेनाथी विशुद्धता नाश पामे छे, विशुद्धता विना
आत्मस्वरूपनुं चिंतन थाय नहि अने आत्मचिंतन विना परम अखिल
कर्मथी छूटवारूप मुक्ति थती नथी. १८-१९-२०.
माटे मोक्षार्थी योगीओए एकांत निर्विकार स्थानने संक्लेशनो
नाश करनारी संसारी भ्रमणने अटकावनार मोक्षनुं कारण जाणवुं.