आ ‘दसलक्षणी’ पर्व ना दिवसो ते खरेखर आराधनाना दिवसो छे. रत्नत्रयधर्मनी विशेषपणे परि–
उपासना करवा माटेना आ धर्मदिवसोने सनातन जैन शासनमां ‘पर्युषण पर्व’ कहेवाय छे......आराधनाना आ महापवित्र पर्वनो अपार महिमा छे. जेम नंदीश्वर अष्टाह्निका भक्तिप्रधान पर्व छे तेम आ दशलक्षणी पर्व
आराधनाप्रधान छे.
हे जीवो! तमारी सर्व शक्तिने रत्नत्रयनी आराधनामां जोडो.