Atmadharma magazine - Ank 291
(Year 25 - Vir Nirvana Samvat 2494, A.D. 1968)
(Devanagari transliteration).

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:३६: आत्मधर्म : पोष : २४९४
एने देखीने श्रेणीकने आश्चर्य थयुं ने
त्यारे भगवाननी वाणीमां एम
थयुं. त्यां अवधिज्ञानथी तेने खबर पडी के
भगवानना दर्शन–पूजननी भावनाना
प्रतापे हुं ‘देडकामांथी देव’ थयो छुं, एटले ते
अहीं आवीने तारी साथे दर्शन–पूजन करी
रह्यो छे.
भगवानना श्रीमुखथी आ वात
सांभळीने ए देवने घणो हर्ष थयो ने
भगवाननो उपदेश सांभळीने ते
सम्यग्दर्शन पाम्यो.
प्रिय पाठक! आपणे पण ए देडकानी
वार्ता पूरी.
बोलो, महावीरभगवानकी....जय.