Atmadharma magazine - Ank 307
(Year 26 - Vir Nirvana Samvat 2495, A.D. 1969)
(Devanagari transliteration).

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* श्री कहान–रत्नचिंतामणि–जयंतिमहोत्सव विशेषांक *
: वैशाख : २४९प आत्मधर्म : ३प :
प्रारंभमां, एक भक्तिद्वारा सीमंधरनाथने सन्देश मोकलाव्यो के ‘स्वस्ति श्री विदेहक्षेत्रे
बिराजमान हे सीमंधरनाथ! भरतक्षेत्रना आपना भक्तोनी विनति स्वीकारीने, वहेला
वहेला विहार करीने आप सोनगढ पधारो.....भारतना भक्तो आपनी वाटुं जुए
छे....’ ए उत्सवप्रसंगे अनेक धार्मिकनाटको, धार्मिक फिल्म (तीर्थधाम सोनगढनी),
वगेरे अवनवा कार्यक्रमो हता. गुरुदेवना प्रतापे सुवर्णधाममां आवा आनंदोत्सवना
अवनवा प्रसंगो बन्या ज करे छे.
श्राविका–ब्रह्मचर्याश्रमनुं उद्घाटन
सं. २००७मां कलकत्ताना (लाडनूवाळा) शेठश्री वछराजश्री गंगवाल वगेरे
सोनगढ पहेलीवार आव्या; अने गुरुदेवना मात्र चार दिवसना परिचयथी ने
पू. बेनश्री–बेननुं जीवन देखीने तेओ एवा प्रभावित थया ते तरत ज जिनमंदिर
पासे विशाळ जग्या खरीदीने लगभग सवालाख रूा. ना खर्चे तेमणे भव्य आश्रमनुं
निर्माण कराव्युं. ए श्री ‘गोगीदेवी दि. जैन श्राविका–ब्रह्मचर्याश्रमनुं उद्घाटन
शेठजीना हस्ते सं. २००८ ना माह सुद पांचमे थयुं. बोधिसमाधिदातार गुरुदेवनी
मंगल आशीषपूर्वक थयेल ए उद्घाटन–महोत्सव अति आनंदकारी हतो. ए दिवस
महावीर प्रभुना प्रतिमाजीने आखो दिवस आश्रममां बिराजमान कर्या हता.
गुरुदेवनुं प्रवचन पण आश्रममां थयुं हतुं. आजे आखो दिवस ने रात भक्ति–
उल्लास ने हर्षनुं वातावरण व्यापी गयुं हतुं, ने पू. बेनश्री–बेननी हितकर
छायामां १६ जेटलां ब्र. बहेनोए आश्रममां वास कर्यो हतो. पछी तो अनुक्रमे
वधता वधता ब्र. बहेनोनी संख्या प० जेटली थई छे. आश्रमनुं वातावरण अनेरुं
छे, ने आदर्श महान छे.
जैन विद्यार्थी गृह
सं. २००८ ना फागण वद बीजे त्रण विद्यार्थीओनी संख्याथी शरू थयेल आ
विद्यार्थीगृहमां आजे ७प जेटला विद्यार्थीओ भणे छे ने विद्यार्थीगृह पोतानुं सुंदर
स्वतंत्र मकान धरावे छे.
मानस्थंभनी तैयारी अने भव्य महोत्सव
सं. २००९ सुधी सौराष्ट्रमां क्यांय मानस्तंभ न हतो, मानस्तंभ शुं कहेवाय –
एनी खबरेय घणाने न हती. दसेक वर्ष पहेलां सोनगढमां जिनमंदिर थयुं त्यारथी ज
मानस्तंभनी भावना भक्तोना मनमां घोळाती हती; ते आ सालमां फळीभूत थई. तेने