Benshreena Vachanamrut-Gujarati (Devanagari transliteration). Bol: 432.

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बहेनश्रीनां वचनामृत
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अदभुत तेनो महिमा छे. ४३१.

प्रश्नआजे वीरनिर्वाणदिनप्रसंगे कृपा करी बे शब्द कहो.

उत्तरश्री महावीर तीर्थाधिनाथ आत्माना पूर्ण अलौकिक आनंदमां अने केवळज्ञानमां परिणमता हता. आजे तेमणे सिद्धदशा प्राप्त करी. चैतन्यशरीरी भगवान आजे पूर्ण अकंप थईने अयोगीपदने पाम्या, चैतन्य- गोळो छूटो पडी गयो, पोते पूर्ण चिद्रूप थई चैतन्यबिंबरूपे सिद्धालयमां बिराजी गया; हवे सदाय समाधिसुखादि अनंत गुणोमां परिणम्या करशे. आजे भरतक्षेत्रमांथी त्रिलोकीनाथ चाल्या गया, तीर्थंकर- भगवाननो वियोग थयो, वीरप्रभुना आजे विरह पड्या. इन्द्रोए उपरथी ऊतरीने आज निर्वाण- महोत्सव ऊजव्यो. देवोए ऊजवेलो ते निर्वाणकल्याणक- महोत्सव केवो दिव्य हशे! तेने अनुसरीने हजु पण लोको दर वर्षे दिवाळीदिने दीपमाळा प्रगटावीने दीपोत्सवीमहोत्सव ऊजवे छे.

आजे वीरप्रभु मोक्ष पधार्या. गणधरदेव श्री गौतमस्वामी तरत ज अंतरमां ऊंडा ऊतरी गया अने वीतरागदशा प्राप्त करी केवळज्ञानने पाम्या. आत्माना