Bruhad Dravya Sangrah-Gujarati (Devanagari transliteration). Adhikar Trijo:Mokshamarga Adhikar Mokshamarga Adhikar Vyavahar Ane Nishchay Mokshamarganu Swaroop.

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मोक्षमार्ग अधिाकार
अतः ऊर्ध्वं विंशतिगाथापर्यन्तं मोक्षमार्गं कथयति तत्रादौ ‘‘सम्मद्दंसण’’
इत्याद्यष्टगाथाभिर्निश्चयमोक्षमार्गव्यवहारमोक्षमार्गप्रतिपादकमुख्यत्वेन प्रथमः अन्तराधिकारस्ततः
परम् ‘‘दुविहं पि मुक्खहेउं’’ इति प्रभृतिद्वादशसूत्रैर्ध्यानध्यातृध्येयध्यानफलकथनमुख्यत्वेन
द्वितीयोऽन्तराधिकारः
इति तृतीयाधिकारे समुदायेन पातनिका
अथ प्रथमतः सूत्रपूर्वार्धेन व्यवहारमोक्षमार्गमुत्तरार्धेन च निश्चयमोक्षमार्ग
निरूपयति :
सम्मद्दंसणणाणं चरणं मोक्खस्स कारणं जाणे
ववहारा णिच्छयदो तत्तियमइओ णिओ अप्पा ।।३९।।
मोक्षमार्ग अधिकार [ १७९
अहींथी आगळ, वीस गाथा सुधी मोक्षमार्गनुं कथन करे छे. त्यां प्रारंभमां
‘‘सम्मद्दंसण’’ इत्यादि आठ गाथाओ द्वारा निश्चयमोक्षमार्ग अने व्यवहारमोक्षमार्गना
प्रतिपादननी मुख्यताथी प्रथम अंतराधिकार छे, त्यारपछी ‘‘दुविहं पि मुक्खहेउं’’ वगेरे
बार सूत्रो द्वारा ध्यान, ध्याता, ध्येय अने ध्यानफळना कथननी मुख्यताथी द्वितीय
अंतराधिकार छे. ए प्रमाणे त्रीजा अधिकारमां समूहरूपे भूमिका छे.
हवे, प्रथम ज सूत्रना पूर्वार्धथी व्यवहारमोक्षमार्ग अने उत्तरार्धथी
निश्चयमोक्षमार्ग कहे छेः
अब सुनि दर्शन ज्ञान सुसार, चारित, शिव - कारन व्यवहार;
निश्चय एक आतमा जानि, तीनांमयी मोक्षमग मानि. ३९.