Bruhad Dravya Sangrah-Gujarati (Devanagari transliteration).

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१८० ]बृहद्द्रव्यसंग्रह
सम्यग्दर्शनं ज्ञानं चरणं मोक्षस्य कारणं जानीहि
व्यवहारात् निश्चयतः तत्त्रिकमयः निजः आत्मा ।।३९।।
व्याख्या‘‘सम्मद्दंसणणाणं चरणं मोक्खस्स कारणं जाणे ववहारा’’
सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्रत्रयं मोक्षस्य कारणं, हे शिष्य ! जानीहि व्यवहारनयात् ‘‘णिच्छयदो
तत्तियमइओ णिओ अप्पा’’ निश्चयतस्तत्त्रितयमयो निजात्मेति तथाहि वीतरागसर्वज्ञप्रणीत-
षड्द्रव्यपञ्चास्तिकायसप्ततत्त्वनवपदार्थसम्यक्श्रद्धानज्ञानव्रताद्यनुष्ठानविकल्परूपो व्यवहारमोक्ष-
मार्गः
निजनिरञ्जनशुद्धात्मतत्त्वसम्यक्श्रद्धानज्ञानानुचरणैकाग्य्रापरिणतिरूपो निश्चयमोक्षमार्गः
गाथा ३९
गाथार्थःसम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान अने सम्यक्चारित्रने व्यवहारनयथी मोक्षनुं
कारण जाणो. सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान अने सम्यक्चारित्रमय निज आत्माने निश्चयथी
मोक्षनुं कारण जाणो.
टीकाः‘‘सम्मद्दंसणणाणं चरणं मोक्खस्स कारणं जाणे ववहारा’’हे शिष्य!
सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान अने सम्यक्चारित्रए त्रणने व्यवहारनयथी मोक्षनुं कारण
जाणो. ‘‘णिच्छयदो तत्तियमइओ णिओ अप्पा’’ निश्चयथी सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान अने
सम्यक्चारित्रए त्रणमय निजात्मा ज मोक्षनुं कारण छे. ते समजाववामां आवे छेः
वीतरागसर्वज्ञप्रणीत छ द्रव्य, पंचास्तिकाय, सात तत्त्व अने नव पदार्थोनां सम्यक्श्रद्धान,
ज्ञान अने व्रतादि आचरणना विकल्परूप
व्यवहारमोक्षमार्ग छे; निज निरंजन
शुद्धात्मतत्त्वनां सम्यक्श्रद्धानज्ञानआचरणनी एकाग्रपरिणतिरूप निश्चयमोक्षमार्ग छे.
१. ‘‘जैनशास्त्रोनुं परमार्थे वीतरागपणुं ज तात्पर्य छे. आ वीतरागपणाने व्यवहारनिश्चयना अविरोध
वडे ज अनुसरवामां आवे तो इष्टसिद्धि थाय छे, परंतु अन्यथा नहीं.’’ [जुओ, श्री पंचास्तिकाय
गाथा १७२ टीका पृष्ठ २५४.] ‘‘छठ्ठा गुणस्थाने मुनियोग्य शुद्ध परिणति निरंतर होवी तेमज
महाव्रतादि संबंधी शुभभावो यथायोग्यपणे होवा ते निश्चय
व्यवहारना अविरोधनुं (सुमेळनुं)
उदाहरण छे. पांचमा गुणस्थाने ते गुणस्थानने योग्य शुद्ध परिणति निरंतर होवी तेमज देशव्रतादि
संबंधी शुभभावो यथायोग्यपणे होवा ते निश्चय
व्यवहारना अविरोधनुं उदाहरण छे.’’ [जुओ, श्री
पंचास्तिकाय गाथा १७२, पृष्ठ २५४ फूटनोट. २]
२. विकल्प छे ते राग छे अने तेनो हर समये अंशे अभाव थतो जाय छे अर्थात् कथंचित् भिन्न
साध्यसाधन भावनो अभाव थतो जाय छे, तेथी तेने व्यवहारमोक्षमार्ग कहे छे. [ जुओ,
पंचास्तिकाय पृष्ठ २३५२३६.]