Bruhad Dravya Sangrah-Gujarati (Devanagari transliteration). Nishchay Ane Vyavahar Mokshamargane Anuroop.

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ए प्रमाणे बीजा स्थळमां आठ गाथाओ पूरी थई.
ए प्रमाणे मोक्षमार्गनुं प्रतिपादन करनार त्रीजा अधिकारमां निश्चय
व्यवहाररूप
मोक्षमार्गना संक्षेपकथनथी बे गाथा, त्यारपछी ते ज मोक्षमार्गना अवयवरूप सम्यग्दर्शन
ज्ञानचारित्रना विशेष व्याख्यानरूपे छ गाथाएम बे स्थळोना समुदायरूप आठ
गाथाओ द्वारा प्रथम अंतराधिकार समाप्त थयो.
हवे, आगळ ध्यान, ध्याता, ध्येय अने ध्यानफळना (ध्यानना फळना) कथननी
मुख्यताथी प्रथम स्थळमां त्रण गाथा, त्यारपछी पंच परमेष्ठिना व्याख्यानरूपे बीजा
स्थळमां पांच गाथा अने त्यारपछी ते ज ध्यानना उपसंहाररूप विशेष व्याख्यान द्वारा
त्रीजा स्थळमां चार गाथाओ छे; ए रीते त्रणे स्थळोना समुदाय वडे बार गाथाओ संबंधी
बीजा अंतराधिकारनी समुदायरूप भूमिका छे.
हवे, निश्चय अने व्यवहार मोक्षमार्गनुं जे ध्यान तेनो अभ्यास करो, एम उपदेश
आपे छेः
इति द्वितीयस्थले गाथाष्टकं गतम्
एवं मोक्षमार्गप्रतिपादकतृतीयाधिकारमध्ये निश्चयव्यवहारमोक्षमार्गसंक्षेपकथनेन
सूत्रद्वयम्, तदनन्तरं तस्यैव मोक्षमार्गस्यावयवभूतानां सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्राणां विशेष-
विवरणरूपेण सूत्रषट्कं चेति स्थलद्वयसमुदायेनाष्टगाथाभिः प्रथमोऽन्तराधिकारः समाप्तः
अतः परं ध्यानध्यातृध्येयध्यानफलकथनमुख्यत्वेन प्रथमस्थले गाथात्रयं, ततः परं
पञ्चपरमेष्ठिव्याख्यानरूपेण द्वितीयस्थले गाथापञ्चकं, ततश्च तस्यैव ध्यानस्योपसंहार-
रूपविशेषव्याख्यानेन तृतीयस्थले सूत्रचतुष्टयमिति स्थलत्रयसमुदायेन द्वादशसूत्रेषु
द्वितीयान्तराधिकारे समुदायपातनिका
तथाहिनिश्चयव्यवहारमोक्षमार्गसाधकध्यानाभ्यासं कुरुत यूयमित्युपदिशति :
दुविहं पि मोक्खहेउं झाणे पाउणदि जं मुणी णियमा
तह्मा पयत्तचित्ता जूयं झाणं समब्भसह ।।४७।।
इम दो विधि चारित मुनिराज, ध्यानयोग पावै सु समाज;
जातैं यत्न धारि यह धरो, नियम रूप भाषै मुनिवरो. ४७
मोक्षमार्ग अधिकार [ २१९