Bruhad Dravya Sangrah-Gujarati (Devanagari transliteration).

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छे ते ज निश्चयमोक्षमार्गस्वरूप छे. ते बीजा क्या क्या पर्यायवाची नामोथी ओळखाय
छे ते कहेवामां आवे छेः ते ज शुद्धात्मस्वरूप छे, ते ज परमात्मस्वरूप छे, ते ज
एकदेश
प्रगटतारूप विवक्षितएकदेशशुद्धनिश्चयनयथी स्वशुद्धात्माना संवेदनथी उत्पन्न
सुखामृतरूपी जळना सरोवरमां रागादिमळ रहित होवाने कारणे परमहंसस्वरूप छे. आ
एकदेश व्यक्तिरूप शुद्धनयना व्याख्यानने परमात्मध्यान
भावनानी नाममाळामां यथासंभव
सर्वत्र योजवुं.
ते ज परब्रह्मस्वरूप छे, ते ज परम विष्णुस्वरूप छे, ते ज परम शिवस्वरूप छे,
ते ज परम बुद्धस्वरूप छे, ते ज परम जिनस्वरूप छे, ते ज परम स्वात्मोपलब्धिलक्षण
सिद्धस्वरूप छे, ते ज निरंजनस्वरूप छे, ते ज निर्मळस्वरूप छे, ते ज स्वसंवेदनज्ञान छे,
ते ज परम तत्त्वज्ञान छे, ते ज शुद्धात्मदर्शन छे, ते ज परमावस्थास्वरूप छे, ते ज
परमात्मानुं दर्शन छे, ते ज परमात्मानुं ज्ञान छे, ते ज परमावस्थारूप परमात्मानुं
स्पर्शन छे, ते ज ध्येयभूत
शुद्धपारिणामिकभावरूप छे, ते ज ध्यानभावनास्वरूप छे, ते
ज शुद्धचारित्र छे, ते ज परमपवित्र छे, ते ज अंतःतत्त्व छे, ते ज परमतत्त्व छे, ते
ज शुद्धात्मद्रव्य छे, ते ज परमज्योति छे, ते ज शुद्ध आत्मानी अनुभूति छे, ते ज
आत्मानी प्रतीति छे, ते ज आत्मानी संवित्ति छे, ते ज स्वरूपनी उपलब्धि छे, ते ज
निश्चयमोक्षमार्गस्वरूपम् तच्च पर्यायनामान्तरेण किं किं भण्यते तदभिधीयते तदेव
शुद्धात्मस्वरूपं, तदेव परमात्मस्वरूपं, तदेवैकदेशव्यक्तिरूपविवक्षितैकदेशशुद्धनिश्चयनयेन
स्वशुद्धात्मसम्वित्तिसमुत्पन्नसुखामृतजलसरोवरे रागादिमलरहितत्वेन परमहंसस्वरूपम्
इदमेकदेशव्यक्तिरूपं शुद्धनयव्याख्यानमत्र परमात्मध्यानभावनानाममालायां यथासम्भवं सर्वत्र
योजनीयमिति
तदेव परब्रह्मस्वरूपं, तदेव परमविष्णुस्वरूपं, तदेव परमशिवस्वरूपं, तदेव परम-
बुद्धस्वरूपं, तदेव परमजिनस्वरूपं, तदेव परमस्वात्मोपलब्धिलक्षणं सिद्धस्वरूपं, तदेव निरञ्जन-
स्वरूपं, तदेव निर्मलस्वरूपं, तदेव स्वसम्वेदनज्ञानम्, तदेव परमतत्त्वज्ञानं, तदेव शुद्धात्मदर्शनं,
तदेव परमावस्थास्वरूपम्, तदेव परमात्मनः दर्शनं, तदेव परमात्मज्ञानं, तदेव परमावस्थारूप
परमात्मस्पर्शनं, तदेव ध्येयभूतशुद्धपारिणामिकभावरूपं, तदेव ध्यानभावनास्वरूपं, तदेव
शुद्धचारित्रं, तदेव परमपवित्रं, तदेवान्तस्तत्त्वं, तदेव परमतत्त्वं, तदेव शुद्धात्मद्रव्यं, तदेव
परमज्योतिः, सैव शुद्धात्मानुभूतिः, सैवात्मप्रतीतिः, सैवात्मसंवित्तिः, सैव स्वरूपोपलब्धिः,
मोक्षमार्ग अधिकार [ २४९