Bruhad Dravya Sangrah-Gujarati (Devanagari transliteration).

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नित्यपदार्थनी प्राप्ति छे, ते ज परमसमाधि छे, ते ज परमानंद छे, ते ज नित्यानंद छे,
ते ज सहजानंद छे, ते ज सदानंद छे, ते ज शुद्धात्मपदार्थना अध्ययनरूप छे, ते ज
परमस्वाध्याय छे, ते ज निश्चयमोक्षनो उपाय छे, ते ज एकाग्रचिंतानिरोध छे, ते ज
परमबोध छे, ते ज शुद्धोपयोग छे, ते ज परमयोग छे, ते ज भूतार्थ छे, ते ज परमार्थ
छे, ते ज निश्चय पंचाचार छे, ते ज समयसार छे, ते ज अध्यात्मसार छे, ते ज समता
आदि निश्चय
षड्आवश्यकस्वरूप छे, ते ज अभेदरत्नत्रयस्वरूप छे, ते ज वीतराग
सामायिक छे, ते ज परम शरणउत्तममंगळ छे, ते ज केवळज्ञाननी उत्पत्तिनुं कारण
छे, ते ज समस्त कर्मोना क्षयनुं कारण छे, ते ज निश्चयचतुर्विध-आराधना छे, ते ज
परमात्मानी भावना छे, ते ज शुद्धात्मानी भावनाथी उत्पन्न सुखनी अनुभूति परमकळा
छे, ते ज दिव्यकळा छे, ते ज परम अद्वैत छे, ते ज परमअमृतरूप परम
- धर्मध्यान छे,
ते ज शुक्लध्यान छे, ते ज रागादिविकल्परहित ध्यान छे, ते ज निष्कल ध्यान छे, ते
ज परम स्वास्थ्य छे, ते ज परम वीतरागपणुं छे, ते ज परम साम्य छे, ते ज परम
एकत्व छे, ते ज परम भेदज्ञान छे, ते ज परम समरसीभाव छे;
इत्यादि, समस्त
रागादि विकल्पउपाधिथी रहित परम - आह्लादरूप एक सुख जेनुं लक्षण छे एवा
ध्यानरूप निश्चयमोक्षमार्गना वाचक अन्य पण पर्यायवाची नामो परमात्मतत्त्वना
ज्ञानीओ द्वारा जाणवा योग्य छे. ५६.
स एव नित्योपलब्धिः, स एव परमसमाधिः, स एव परमानन्दः, स एव नित्यानन्दः, स
एव सहजानन्दः, स एव सदानन्दः, स एव शुद्धात्मपदार्थाध्ययनरूपः, स एव परमस्वाध्यायः,
स एव निश्चयमोक्षोपायः, स एव चैकाग्रचिन्तानिरोधः, स एव परमबोधः, स एव
शुद्धोपयोगः, स एव परमयोगः, स एव भूतार्थः, स एव परमार्थः, स एव निश्चयपञ्चाचारः,
स एव समयसारः, स एवाध्यात्मसारः, तदेव समतादिनिश्चयषडावश्यकस्वरूपं, तदेवाभेद-
रत्नत्रयस्वरूपंः, तदेव वीतरागसामायिकं, तदेव परमशरणोत्तममङ्गलं, तदेव केवलज्ञानोत्पत्ति-
कारणं तदेव सकलकर्मक्षयकारणं, सैव निश्चयचतुर्विधाराधना, सैव परमात्मभावना, सैव
शुद्धात्मभावनोत्पन्नसुखानुभूतिरूपपरमकला, सैव दिव्यकला, तदेव परमाद्वैतं, तदेव परमामृत-
परमधर्मध्यानं, तदेव शुक्लध्यानं, तदेव रागादिविकल्पशून्यध्यानं, तदेव निष्कलध्यानं, तदेव
परमस्वास्थ्यं, तदेव परमवीतरागत्वं, तदेव परमसाम्यं, तदेव परमैकत्वं, तदेव परमभेदज्ञानं,
स एव परमसमरसीभावः इत्यादि समस्तरागादिविकल्पोपाधिरहितपरमाह्लादैकसुखलक्षण-
ध्यानरूपस्य निश्चयमोक्षमार्गस्य वाचकान्यन्यान्यपि पर्यायनामानि विज्ञेयानि भवन्ति
परमात्मतत्त्वविद्भिरिति
।।५६।।
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