Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration). Gatha: 6 (Dhal 5).

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पांचमी ढाळ ][ १४३
एकत्व भावना
शुभ-अशुभ करमफल जेते, भोगै जिय एक हि तेते;
सुत-दारा होय न सीरी, सब स्वारथके हैं भीरी. ६.
अन्वयार्थ(जेते) जेटला (शुभ करमफळ) शुभकर्मनां
फळ अने (अशुभ करमफळ) अशुभकर्मनां फळ छे (ते ते) ते
बधां (जिय) आ जीव (एक हि) एकलो ज (भोगै) भोगवे छे,
(सुत) पुत्र (दारा) स्त्री (सीरी) साथीदार (न होय) थतां नथी,
(सब) आ बधां (स्वारथके) पोतानी मतलबना (भीरी) सगां
(हैं) छे.
भावार्थजीवने सदाय पोताथी पोतानुं एकत्व अने
परथी विभक्तपणुं छे, तेथी पोते ज पोतानुं हित अथवा
अहित करी शके छे, परनुं कांई करी शकतो नथी. माटे जीव जे
कांई शुभ के अशुभ भाव करे छे तेनुं फळ-(आकुळता) पोते ज
एकलो भोगवे छे. तेमां कोई अन्य-स्त्री, पुत्र, मित्र वगेरे