सुत-दारा होय न सीरी, सब स्वारथके हैं भीरी. ६.
बधां (जिय) आ जीव (एक हि) एकलो ज (भोगै) भोगवे छे,
(सुत) पुत्र (दारा) स्त्री (सीरी) साथीदार (न होय) थतां नथी,
(सब) आ बधां (स्वारथके) पोतानी मतलबना (भीरी) सगां
(हैं) छे.
अहित करी शके छे, परनुं कांई करी शकतो नथी. माटे जीव जे
कांई शुभ के अशुभ भाव करे छे तेनुं फळ-(आकुळता) पोते ज
एकलो भोगवे छे. तेमां कोई अन्य-स्त्री, पुत्र, मित्र वगेरे