Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration). Gatha: 7 (Dhal 5).

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१४४ ][ छ ढाळा
अन्वयार्थ(जिय-तन) जीव अने शरीर (जल-पय
ज्यों) पाणी अने दूधनी जेम (मेला) मळेला छे (पै) तोपण
(भेला) भेगां-एकरूप (नहिं) नथी, (भिन्न भिन्न) जुदांजुदां छे;
(तो) तो पछी (प्रगट) बहारमां प्रगटरूपथी (जुदे) जुदां देखाय
भागीदार थई शकतां नथी, केमके ते बधां पर पदार्थ छे अने
ते जीवादि सर्व पदार्थ जीवने ज्ञेयमात्र छे तेथी तेओ कोईपण
जीवना खरेखर सगां-संबंधी छे ज नहि, छतां अज्ञानी हवे
तेने पोताना मानी दुःखी थाय छे.
संसारमां अने मोक्षमां आ जीव एकलो ज छे एम जाणी
सम्यग्द्रष्टि जीव निज शुद्ध आत्मा साथे ज पोतानुं सदाय
एकत्व मानी पोतानी निश्चयपरिणति द्वारा शुद्ध एकत्वनी वृद्धि
करे छे ते एकत्व भावना छे. ६.
अन्यत्व भावना
जल-पय ज्यों जिय-तन मेला, पै भिन्न भिन्न नहिं भेला;
तो प्रगट जुदे धन-धामा, क्यों ह्वै इक मिलि सुत-रामा. ७.