Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration). Gatha: 8 (Dhal 5).

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पांचमी ढाळ ][ १४५
छे एवा (धन) लक्ष्मी (धामा) मकान (सुत) पुत्र अने (रामा)
स्त्री वगेरे (मिलि) मळीने (इक) एक (क्यों) केम (ह्वै) होई शके?
भावार्थजेम दूध अने पाणी एक आकाश-क्षेत्रे मळेला
छे परंतु पोतपोताना गुण वगेरेनी अपेक्षाए बन्ने तद्दन जुदां
जुदां छे, तेम आ जीव अने शरीर पण मळेलां देखाय छे
तोपण ते बन्ने पोतपोताना स्वरूपादिनी अपेक्षाए (स्वद्रव्य-
क्षेत्र-काळ-भावथी) तद्दन जुदां जुदां छे-कदी एक थतां नथी.
जीव अने शरीर पण ज्यां जुदां-जुदां छे तो पछी प्रगट जुदां
देखातां एवां धन, मकान, बाग-बगीचा, पुत्र-पुत्री अने स्त्री,
गाडी, मोटर वगेरे पोतानी साथे एक केवी रीते होय? एटले
के पुत्र, स्त्री वगेरे कोईपण वस्तु पोतानी नथी. एम सर्व पर
पदार्थो पोतानाथी भिन्न जाणी, स्वसन्मुखतापूर्वक सम्यग्द्रष्टि
जीव वीतरागतानी वृद्धि करे छे, ते अन्यत्व भावना छे. ७.
अशुचि भावना
पल रुधिर राध मल थैली, कीकस वसादितैं मैली;
नव द्वार बहैं घिनकारी, अस देह करै किम यारी? ८.
अन्वयार्थजे (पल) मांस (रुधिर) लोही (राध) परु
अने (मल) विष्टानी (थैली) कोथळी छे, (कीकस) हाडकां
(वसादितैं) चरबी वगेरेथी (मैली) अपवित्र छे अने जेमां
(घिनकारी) घृणा-ग्लानि उत्पन्न करवावाळां (नव द्वार) नव
दरवाजा (बहैं) वहे छे (अस) एवा (देह) शरीरमां (यारी) प्रेम-
राग (किम) केम (करै) कराय?