स्त्री वगेरे (मिलि) मळीने (इक) एक (क्यों) केम (ह्वै) होई शके?
जुदां छे, तेम आ जीव अने शरीर पण मळेलां देखाय छे
तोपण ते बन्ने पोतपोताना स्वरूपादिनी अपेक्षाए (स्वद्रव्य-
क्षेत्र-काळ-भावथी) तद्दन जुदां जुदां छे-कदी एक थतां नथी.
जीव अने शरीर पण ज्यां जुदां-जुदां छे तो पछी प्रगट जुदां
देखातां एवां धन, मकान, बाग-बगीचा, पुत्र-पुत्री अने स्त्री,
गाडी, मोटर वगेरे पोतानी साथे एक केवी रीते होय? एटले
के पुत्र, स्त्री वगेरे कोईपण वस्तु पोतानी नथी. एम सर्व पर
पदार्थो पोतानाथी भिन्न जाणी, स्वसन्मुखतापूर्वक सम्यग्द्रष्टि
जीव वीतरागतानी वृद्धि करे छे, ते अन्यत्व भावना छे. ७.
नव द्वार बहैं घिनकारी, अस देह करै किम यारी? ८.
(वसादितैं) चरबी वगेरेथी (मैली) अपवित्र छे अने जेमां
(घिनकारी) घृणा-ग्लानि उत्पन्न करवावाळां (नव द्वार) नव
दरवाजा (बहैं) वहे छे (अस) एवा (देह) शरीरमां (यारी) प्रेम-
राग (किम) केम (करै) कराय?