Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration). Gatha: 9 (Dhal 5).

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पांचमी ढाळ ][ १४७
आuाव भावना
जो योगनकी चपलाई, तातैं ह्वै आस्रव भाई;
आस्रव दुखकार घनेरे; बुधिवंत तिन्है निरवेरे. ९.
अन्वयार्थ(भाई) हे भव्य जीव! (योगनकी) योगनी
(जो) जे (चपलाई) चंचळता छे (तातैं) तेनाथी (आस्रव) आस्रव
(ह्वै) थाय छे, अने (आस्रव) ते आस्रव (घनेरे) घणुं (दुखकार)
दुःख करनार छे; माटे (बुधिवंत) समजदार (तिन्है) तेने
(निरवेरे) दूर करे!
भावार्थविकारी शुभाशुभ भावरूप जे अरूपी अवस्था
जीवमां थाय छे ते भावआस्रव छे, अने ते समये नवीन
कर्मयोग्य रजकणोनुं स्वयं-स्वतः आववुं (आत्मानी साथे
एकक्षेत्रमां आगमन थवुं) ते द्रव्यास्रव छे. [अने तेमां जीवना
अशुद्ध पर्याय निमित्तमात्र छे.]
पुण्यपाप बेय आस्रव अने बंधना भेद छे.
पुण्यदया, दान, भक्ति, पूजा, व्रत वगेरे शुभभाव