Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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पांचमी ढाळ ][ १४९
आत्माना (अनुभव) अनुभवमां [शुद्ध उपयोगमां] (चित)
ज्ञानने (दीना) लगाव्युं छे (तिनही) तेओए (आवत) आवतां
(विधि) कर्मोने (रोके) रोक्या छे अने (संवर लहि) संवर प्राप्त
करीने (सुख) सुखनो (अवलोके) साक्षात्कार कर्यो छे.
भावार्थआस्रवनुं रोकवुं ते संवर छे. सम्यग्दर्शनादि
वडे मिथ्यात्वादि आस्रवो रोकाय छे. शुभ उपयोग अने अशुभ
उपयोग बन्ने बंधना कारण छे एम सम्यग्द्रष्टि जीव प्रथमथी
ज जाणे छे. जोके साधकने नीचली भूमिकामां शुद्धतानी साथे
अल्प शुभाशुभभाव होय छे तोपण ते बन्नेने बंधनुं कारण माने
छे, तेथी सम्यग्द्रष्टि जीव स्वद्रव्यना आलंबनवडे जेटला अंशे
शुद्धता करे छे तेटला अंशे तेने संवर थाय छे, अने क्रमे क्रमे ते
शुद्धता वधारीने पूर्ण शुद्धता प्राप्त करे छे. सम्यग्द्रष्टि जीव पोते
स्वसन्मुखतापूर्वक जे शुद्धता (संवर) प्राप्त करे छे ते संवर
भावना छे.