ज्ञानने (दीना) लगाव्युं छे (तिनही) तेओए (आवत) आवतां
(विधि) कर्मोने (रोके) रोक्या छे अने (संवर लहि) संवर प्राप्त
करीने (सुख) सुखनो (अवलोके) साक्षात्कार कर्यो छे.
उपयोग बन्ने बंधना कारण छे एम सम्यग्द्रष्टि जीव प्रथमथी
ज जाणे छे. जोके साधकने नीचली भूमिकामां शुद्धतानी साथे
अल्प शुभाशुभभाव होय छे तोपण ते बन्नेने बंधनुं कारण माने
छे, तेथी सम्यग्द्रष्टि जीव स्वद्रव्यना आलंबनवडे जेटला अंशे
शुद्धता करे छे तेटला अंशे तेने संवर थाय छे, अने क्रमे क्रमे ते
शुद्धता वधारीने पूर्ण शुद्धता प्राप्त करे छे. सम्यग्द्रष्टि जीव पोते
स्वसन्मुखतापूर्वक जे शुद्धता (संवर) प्राप्त करे छे ते संवर
भावना छे.