Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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छठ्ठी ढाळ ][ १७९
अपेक्षाए उपचारथी कह्यां छे. तेने व्यवहारमात्र धर्मसंज्ञा
जाणवी. आ रहस्यने (अज्ञानी) जाणतो नथी तेथी तेने
निर्जरानुं
तपनुं पण साचुं श्रद्धान नथी.
(मोक्षमार्ग प्रकाशक पृ. २३३ थी २३६)
प्रश्नक्रोधादिनो त्याग अने उत्तम क्षमादि क्यारे
थाय?
उत्तरबंधादिना भयथी वा स्वर्ग-मोक्षनी इच्छाथी
(अज्ञानी जीव) क्रोधादिक करतो नथी, पण त्यां क्रोध-मानादि
करवानो अभिप्राय तो गयो नथी. जेम कोई राजादिकना
भयथी वा मोटाई-आबरू-प्रतिष्ठाना लोभथी परस्त्री सेवतो
नथी तो तेने त्यागी कही शकाय नहि; ते ज प्रमाणे आ पण
क्रोधादिनो त्यागी नथी. तो केवी रीते त्यागी होय?
के जे
पदार्थ इष्ट-अनिष्ट भासतां क्रोधादि थाय छे, पण ज्यारे
तत्त्वज्ञानना अभ्यासथी कोई इष्ट-अनिष्ट न भासे त्यारे स्वयं
क्रोधादिक ऊपजतां नथी अने त्यारे ज साचा क्षमादि थाय छे.
(मोक्षमार्ग प्र
२३२)
(४) हवे स्वरूपाचरण चारित्रनुं वर्णन गाथा ८ मां कहेशे
ते सांभळो, जे प्रगट थवाथी पोताना आत्मानी अनंतज्ञान-
अनंतदर्शन-अनंतसुख अने अनंतवीर्य वगेरे शक्तिओनो पूर्ण
विकास प्रगट थाय छे अने परपदार्थ तरफनी बधां प्रकारनी
प्रवृत्ति दूर थाय छे-ते स्वरूपाचरणचारित्र छे. ७.