करि) केवळज्ञानथी (सब) त्रणलोकमां होवावाळा बधां
पदार्थोना गुण अने पर्यायने (लख्यो) प्रत्यक्ष जाणी ले छे
अने त्यारे (भविलोक को) भव्य जीवोने (शिवमग) मोक्षमार्ग
(कह्यो) बतावे छे.
त्यारे तेमने जे आनंद होय छे ते आनंद इन्द्र, नागेन्द्र, नरेन्द्र
(चक्रवर्ती) के अहमिन्द्र (कल्पातीत देव)ने पण होतो नथी. आ
स्वरूपाचरण चारित्र प्रगट थया पछी स्वद्रव्यमां उग्र