Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration).

< Previous Page   Next Page >


Page 188 of 205
PDF/HTML Page 210 of 227

 

background image
१८८ ][ छ ढाळा
अन्वयार्थ(पुनि) केवळज्ञान पाम्या पछी (शेष)
बाकीना चार (अघाति विधि) अघातिया कर्मोनो (घाति) नाश
करीने (छिनमाहिं) थोडा समयमां (अष्टम भू) आठमी पृथ्वी
इषत् प्राग्भार-मोक्ष क्षेत्रमां (वसैं) निवास करे छे, त्यां तेमने
(वसु कर्म) आठ कर्मोना (विनसै) नाश थवाथी (सम्यक्त्व
आदिक) सम्यक्त्व वगेरे (सब) बधा (वसु सुगुण) आठ मुख्य
गुणो (लसैं) शोभायमान थाय छे; [आवा सिद्ध थनार
मुक्तात्मा] (संसार खार अपार पारावार) संसाररूपी खारा
अने अगाध समुद्रने (तरि) तरीने (तीरहिं) बीजा किनाराने
(गये) प्राप्त थाय छे अने (अविकार) विकाररहित, (अकल)
शरीररहित, (अरूप) रूपरहित (शुचि) शुद्ध-निर्दोष (चिद्रूप)
दर्शन-ज्ञान-चेतनास्वरूप तथा (अविनाशी) नित्य-कायमी (भये)
थाय छे.
भावार्थअरिहंत अवस्था अथवा केवळज्ञान पाम्या
पछी ते जीवने पण जे जे गुणोना पर्यायोमां अशुद्धता होय छे
तेनो क्रमे क्रमे अभाव थईने ते जीव पूर्ण शुद्ध दशाने प्रगट
करे छे अने ते समये असिद्धत्व नामना पोताना उदयभावनो
नाश थाय छे अने चार अघाति कर्मोनो पण स्वयं सर्वथा
अभाव थाय छे. सिद्धदशामां सम्यक्त्व आदि आठ गुणो
(गुणोना निर्मळ पर्यायो) प्रगट थाय छे. आठ व्यवहारथी कह्या
छे, निश्चयथी अनंत गुणो (सर्व गुणोना पर्यायो) शुद्ध थाय छे,
अने स्वाभाविक ऊर्ध्वगमनना कारणे एक समय मात्रमां लोकाग्रे