Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration). Gatha: 13 (Dhal 6).

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छठ्ठी ढाळ ][ १८९
पहोंची जई त्यां ज स्थिर रहे छे. एवा जीवो संसाररूपी
दुःखदायी अने अगाध समुद्रथी पार थयेल छे; तथा ते ज जीव
निर्विकारी, अशरीरी, अमूर्तिक शुद्ध चैतन्यरूप अने अविनाशी
थईने सिद्धदशाने पाम्या छे. १२.
मोक्ष अवस्थानुं वर्णन
निजमाहिं लोक-अलोक गुण-परजाय प्रतिबिम्बित थये,
रहि हैं अनंतानंत काल, यथा तथा शिव परिणये;
धनि धन्य हैं जे जीव, नरभव पाय यह कारज किया,
तिनही अनादि भ्रमण पंचप्रकार तजि, वर सुख लिया. १३.
अन्वयार्थ(निजमांहि) ते सिद्ध भगवानना आत्मामां
(लोक अलोक) लोक अने अलोकना (गुण परजाय) गुण अने
पर्याय (प्रतिबिम्बित थये) झळकवा लागे छे अर्थात
् जणाय छे,
ते (यथा) जेम (शिव) मोक्षरूपे (परिणये) परिणम्या छे (तथा)
तेम (अनंतानंत) अनंतकाळ सुधी (रहिहैं) रहेशे.