अंतर-प्रदर्शन
(१) ‘नय’ तो ज्ञाता एटले के जाणनार छे, अने
‘निक्षेप’ ज्ञेय अर्थात् ज्ञानमां जाणवा योग्य छे.
(२) प्रमाण तो वस्तुना बधा भागने जाणे छे पण नय
वस्तुना एक भागने जाणे छे.
(३) शुभ उपयोग तो बंधनुं अथवा संसारनुं कारण छे
पण शुद्ध उपयोग तो निर्जरा-मोक्षनुं कारण छे.
छÕी ढाळनी प्रश्नावली
(१) अंतरंग तप, अनुभव, आवश्यक, गुप्ति, गुप्तिओ,
तप, द्रव्यहिंसा, अहिंसा, ध्यानस्थ मुनि, निश्चय आत्मचारित्र,
परिग्रह, प्रमाण, प्रमाद, प्रतिक्रमण, बहिरंग तप, भावहिंसा,
अहिंसा, महाव्रत, महाव्रतो, रत्नत्रय, शुद्धात्मअनुभव, शुद्ध
उपयोग, शुक्लध्यान, समितिओ अने समिति वगेरेनां लक्षण
बतावो.
(२) अघातिया, आवश्यक, उपयोग, कायगुप्ति, छेंतालीश
दोष, तप, धर्म परिग्रह, प्रमाण, मुनिक्रिया, महाव्रत,
रत्नत्रय, शील, शेष गुण, समिति, साधुगुण अने सिद्धगुणना
भेद कहो.
(३) नय अने निक्षेपमां, प्रमाण अने नयमां, ज्ञान
अने आत्मामां, शुभ उपयोग अने शुद्ध उपयोगमां तफावत
बतावो.
२०२ ][ छ ढाळा