Moksha Marg Prakashak-Gujarati (Devanagari transliteration).

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करी ते शुं परस्त्रीसेवनने भलुं जाणी करी हशे? तथा ए कृष्ण एक राधा ज विषे आसक्त
न थया परंतु अन्य गोपीओ
*कुब्जा आदि अनेक परस्त्रीओमां पण आसक्त थया. ए
अवतार एवां ज कार्योनो अधिकारी थयो.
वळी तेओ कहे छे के‘‘लक्ष्मी तेनी स्त्री छे’’ अने धनादिकने लक्ष्मी कहे छे? पण
ते तो पृथ्वी आदिमां जेम पाषाण अने धूळ आदि छे तेम रत्नसुवर्णादिकने जोईए छीए.
एथी जुदी लक्ष्मी कोण छे के जेनो भरथार नारायण छे? वळी तेओ सीतादिकने मायानुं
स्वरूप कहे छे. हवे तेमां ते आसक्त थया त्यारे ते मायामां ज आसक्त थया केम न कहेवाय?
बहु क्यां सुधी कहीए? तेओ जे निरूपण करे छे ते बधुं विरुद्ध करे छे. परंतु जीवोने
भोगादिकनी वात गमे छे तेथी तेमनुं कहेवुं वहालुं लागे छे.
ए प्रमाणे तेओ अवतार कहे छे, अने तेने ब्रह्मस्वरूप कहे छे. तथा अन्य जीवोने
पण ब्रह्मस्वरूप कहे छे. एक तो महादेवने तेओ ब्रह्मस्वरूप माने छे, अने तेने वळी योगी
कहे छे, पण तेणे योग शा माटे ग्रहण कर्यो? मृगछाला अने भस्म धारण करे छे ते शा
माटे धारण करे छे? ते रुंडमाला पहेरे छे. हवे ज्यारे हांडकांने अडकवुं पण निंद्य छे. तो
तेने गळामां शा माटे धारण करे छे? सर्पादिक सहित छे, अने आंकडो
धतूरो खाय छे तेमां
शुं मोटाई के भलाई छे? त्रिशूलादि ते राखे छे पण तेने कोनो भय छे? पार्वतीना संगसहित
छे पण योगी बनी जोडे स्त्री राखे छे एवुं विपरीतपणुं तेणे शा माटे कर्युं? जो कामासक्त
हता तो घरमां ज रहेवुं हतुं! तथा नानाप्रकारे तेणे विपरीत चेष्टाओ करी तेनुं प्रयोजन तो
कांई जणातुं नथी, मात्र बहावरा जेवुं कर्तव्य देखाय छे छतां तेने तेओ ब्रह्मस्वरूप कहे छे.
वळी तेओ कृष्णने महादेवना सेवक कहे छे, कोई वेळा तेने कृष्णना सेवक कहे छे
तथा कोई वेळा बंनेने एक कहे छे. कांई ठेकाणुं ज नथी.
सूर्यादिकने ब्रह्मनुं स्वरूप कहे छे. विष्णुए कह्युं छे के‘‘धातुओमां सुवर्ण, वृक्षोमां
कल्पवृक्ष तथा जुगारमां जूठ इत्यादिकमां हुं ज छुं,’’ एम तेओ कहे छे, पण पूर्वापर कंई
विचारता ज नथी. कोई एक अंग वडे संसारी जीवने महंत माने अने तेने ज ब्रह्मनुं स्वरूप
पण कहे तो ‘‘ब्रह्म सर्वव्यापी छे’’ एवुं विशेषण शा माटे आपो छो? ‘सूर्यादिकमां वा
सुवर्णादिकमां पण ब्रह्म छे;’’ हवे सूर्य अजवाळुं करे छे अने सुवर्ण धन छे इत्यागि गुणो
वडे तेमां ब्रह्म मान्यो, तो सूर्यनी माफक दीपादिक पण अजवाळुं करे छे तथा सुवर्णनी माफक
रूपुं, लोखंड आदि पण धन छे, इत्यादि गुण अन्य पदार्थोमां पण छे तो तेमने पण ब्रह्म
मानो! तेमने नाना
मोटा मानो पण जाति तो एक थई. एम जूठी महंतता ठराववा माटे
तेओ अनेक प्रकारनी युक्तिओ बनावे छे.
* भागवतस्कंध १०, अ. ४८, १११.
११४ ][ मोक्षमार्गप्रकाशक
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