लोभ माटे राजा वगेरेने भ्रममां नाखे छे. पण कोई विषथी जीवनवृद्धि थवी कहे ए जेम
प्रत्यक्षविरुद्ध छे तेम हिंसा करतां धर्म अने कार्यसिद्धि थवी कहेवी ए प्रत्यक्षविरुद्ध छे, परंतु
तेमणे जेमनी हिंसा करवी कही, तेमनी तो कांई शक्ति नथी अने तेमनी कोईने कांई पीडा
पण नथी. जो कोई शक्तिवाननो के इष्टनो होम करवो ठराव्यो होत तो ठीक पडत, पण
पापनो भय नथी तेथी तेओ पोताना लोभ माटे दुर्बळना घातक बनी पोतानुं वा अन्यनुं
बूरुं करवामां तत्पर थया छे.
✾ निर्गुण अने सगुण भकितनी मीमांसा ✾
तेओ भक्तियोग अने ज्ञानयोग एम बे प्रकार वडे मोक्षमार्ग प्ररूपण करे छे.
✾ भकितयोग मीमांसा –
तेमां प्रथम भक्तियोगवडे मोक्षमार्ग तेओ कहे छे, तेनुं स्वरूप अहीं कहीए छीए —
निर्गुण अने सगुण भेदरूप बे प्रकारनी भक्तिओ तेओ कहे छे. अद्वैत परब्रह्मनी
भक्ति करवी ते निर्गुणभक्ति छे. ते आ प्रमाणे कहे छेः — ‘‘तमे निराकार छो, निरंजन
छो, मन – वचनथी अगोचर छो, अपार छो, सर्वव्यापी छो, एक छो, सर्वना प्रतिपालक छो,
अधमउद्धारक छो अने सर्वना कर्ता – हर्ता छो.’’ इत्यादि विशेषणोवडे गुण गाय छे. हवे तेमां
निराकारादि कोई विशेषणो तो अभावरूप छे, तेने सर्वथारूप मानवाथी अभाव ज भासे.
कारण के – वस्तु विना आकारादि केवी रीते भासे? तथा सर्वव्यापी आदि केटलांक विशेषणो
असंभवरूप छे, तेनुं असंभवणुं पहेलां दर्शाव्युं छे.
वळी एम कहे छे के — ‘‘जीवबुद्धिवडे हुं तारो दास छुं, शास्त्रद्रष्टिवडे तारो अंश छुं
तथा तत्त्वबुद्धिवडे तुं ज हुं छुं? पण ए त्रणे भ्रम छे. वळी ए भक्ति करवावाळो चेतन
छे के जड? जो चेतन छे तो ए चेतना ब्रह्मनी छे के तेनी ज छे? जो ब्रह्मनी छे तो
‘‘हुं तारो दास छुं’’ एम मानवुं चेतनाने ज थाय छे. हवे चेतना तो ब्रह्मनो स्वभाव ठर्यो
तथा स्वभाव – स्वभावीने तादात्म्य संबंध छे, तो त्यां दास अने स्वामीनो संबंध केम बने?
दास – स्वामी संबंध तो बे भिन्न पदार्थो होय त्यां ज बने. तथा जो ए चेतना तेनी ज
छे तो ते पोतानी चेतनानो धणी ब्रह्मथी जुदो पदार्थ ठर्यो. तो पछी ‘‘हुं अंश छुं, अथवा
तुं छे ते हुं छुं,’’ — एम कहेवुं जूठ थयुं. वळी भक्ति करवावाळो जड छे, तो जडने बुद्धिनुं
होवुं असंभवित छे, तो तेने एवी बुद्धि क्यांथी थई के – ‘‘हुं दास छुं’’ एम कहेवुं तो त्यारे
ज बने के – ज्यारे बंने पदार्थ जुदा होय. तथा ‘‘तारो हुं अंश छुं’’ एम कहेवुं पण बनतुं
नथी. कारण के – ‘तुं’ अने ‘हुं’ एम कहेवुं तो त्यारे ज बने के – ज्यारे पोते अने ते जुदा
ज होय. पण अंश – अंशी जुदा केवी रीते होय? कारण के – अंशी ए कोई जुदी वस्तु नथी
पण अंशोनो समुदाय ते ज अंशी छे. वळी ‘‘तुं छे ते हुं छुं’’ — एवुं वचन ज विरुद्ध छे.
११६ ][ मोक्षमार्गप्रकाशक