वळी तेओ कोईने घणां तपश्चरणादि वडे मोक्षनुं साधन कठण बतावे छे. त्यारे कोईने
सुगमपणे ज मोक्ष थयो कहे छे. उद्धवादिकने परम भक्त कही तेने तो तपनो उपदेश आप्यो
कहे छे, त्यारे वेश्यादिकने परिणाम विना केवळ नामादिकथी ज तरवुं बतावे छे. कांई ठेकाणुं
ज नथी.
ए प्रमाणे तेओ मोक्षमार्गनुं अन्यथा प्ररूपण करे छे.
✾ अन्यमतकल्पित मोक्षमार्गनी मीमांसा ✾
केटलाक मोक्षस्वरूपनुं पण अन्यथा प्ररूपण करे छे. त्यां मोक्ष अनेक प्रकारे बतावे
छेः —
एक तो मोक्ष एवो कहे छे के — ‘‘वैकुंठधाममां ठाकोरजी ठकुराणीसहित नाना
भोगविलास करे छे, त्यां जई प्राप्त थाय अने तेमनी टहेल (सेवा) कर्या करे ते मोक्ष छे.’’
पण ए तो विरुद्ध छे, कारण के प्रथम तो ठाकोरजी पण संसारीवत् विषयासक्त थई रह्या
छे, तो जेम राजादिक छे तेवा ज ठाकोरजी थया. वळी अन्यनी पासे सेवा कराववी थई,
त्यारे तो ठाकोरजीने पराधीनपणुं थयुं. अने आ मोक्ष पामी त्यां पण सेवा कर्यां करे, तो
जेवी राजानी चाकरी करवी, तेवी आ पण चाकरी ज थई. तो त्यां पराधीनता थतां सुख
केवी रीते होय? तेथी ते पण बनतुं नथी.
एक मोक्ष एवो कहे छे के — ‘‘त्यां ईश्वरनी समान पोते थाय छे.’’ ए पण मिथ्या
छे. जो ईश्वरनी समान अन्य पण जुदां होय तो घणा ईश्वर थतां लोकनो कर्ता – हर्ता कोण
ठरशे? बधाय ठरशे तो तेमां जुदी – जुदी इच्छा थतां परस्पर विरोध थाय. तथा ईश्वर एक
ज छे तो समानता न थई, अने तेथी न्यून छे तेनामां नीचापणाथी उच्चता पामवानी
व्याकुलता रही, त्यारे ते सुखी केम होय? जेम संसारमां नाना – मोटा राजाओ होय छे, तेम
मोक्षमां पण नाना – मोटा ईश्वर थया. एम पण बने नहि.
एक मोक्ष एवो कहे छे के — वैकुंठमां दीपकना जेवी ज्योति छे, त्यां ए ज्योतमां
ज्योत जई मळे छे,’’ ए पण मिथ्या छे. कारण के – दीपकनी ज्योति तो मूर्तिक – अचेतन छे
एवी ज्योति त्यां केम संभवे? वळी ज्योतमां ज्योत मळतां आ ज्योत रहे छे के नाश पामे
छे? जो रहे छे तो ज्योत वधती जशे; अने तेथी ज्योतिमां हीनाधिकपणुं थशे तथा जो विणसी
जाय छे तो ज्यां पोतानी ज सत्ता नाश थाय, एवुं कार्य उपादेय केम मानीए? माटे एम
पण बनतुं नथी.
एक मोक्ष एवो कहे छे के — ‘‘आत्मा ब्रह्म ज छे, मायानुं आवरण मटतां मुक्ति ज
छे.’’ ए पण मिथ्या छे. कारण के ते मायाना आवरणसहित हतो; त्यारे ब्रह्मथी एक हतो
पांचमो अधिकारः अन्यमत निराकरण ][ १२३