Moksha Marg Prakashak-Gujarati (Devanagari transliteration). Anyamatakalpit Mokshamargani Mimamsa.

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वळी तेओ कोईने घणां तपश्चरणादि वडे मोक्षनुं साधन कठण बतावे छे. त्यारे कोईने
सुगमपणे ज मोक्ष थयो कहे छे. उद्धवादिकने परम भक्त कही तेने तो तपनो उपदेश आप्यो
कहे छे, त्यारे वेश्यादिकने परिणाम विना केवळ नामादिकथी ज तरवुं बतावे छे. कांई ठेकाणुं
ज नथी.
ए प्रमाणे तेओ मोक्षमार्गनुं अन्यथा प्ररूपण करे छे.
अन्यमतकल्पित मोक्षमार्गनी मीमांसा
केटलाक मोक्षस्वरूपनुं पण अन्यथा प्ररूपण करे छे. त्यां मोक्ष अनेक प्रकारे बतावे
छेः
एक तो मोक्ष एवो कहे छे के‘‘वैकुंठधाममां ठाकोरजी ठकुराणीसहित नाना
भोगविलास करे छे, त्यां जई प्राप्त थाय अने तेमनी टहेल (सेवा) कर्या करे ते मोक्ष छे.’’
पण ए तो विरुद्ध छे, कारण के प्रथम तो ठाकोरजी पण संसारीवत् विषयासक्त थई रह्या
छे, तो जेम राजादिक छे तेवा ज ठाकोरजी थया. वळी अन्यनी पासे सेवा कराववी थई,
त्यारे तो ठाकोरजीने पराधीनपणुं थयुं. अने आ मोक्ष पामी त्यां पण सेवा कर्यां करे, तो
जेवी राजानी चाकरी करवी, तेवी आ पण चाकरी ज थई. तो त्यां पराधीनता थतां सुख
केवी रीते होय? तेथी ते पण बनतुं नथी.
एक मोक्ष एवो कहे छे के‘‘त्यां ईश्वरनी समान पोते थाय छे.’’ ए पण मिथ्या
छे. जो ईश्वरनी समान अन्य पण जुदां होय तो घणा ईश्वर थतां लोकनो कर्ताहर्ता कोण
ठरशे? बधाय ठरशे तो तेमां जुदीजुदी इच्छा थतां परस्पर विरोध थाय. तथा ईश्वर एक
ज छे तो समानता न थई, अने तेथी न्यून छे तेनामां नीचापणाथी उच्चता पामवानी
व्याकुलता रही, त्यारे ते सुखी केम होय? जेम संसारमां नाना
मोटा राजाओ होय छे, तेम
मोक्षमां पण नानामोटा ईश्वर थया. एम पण बने नहि.
एक मोक्ष एवो कहे छे केवैकुंठमां दीपकना जेवी ज्योति छे, त्यां ए ज्योतमां
ज्योत जई मळे छे,’’ ए पण मिथ्या छे. कारण केदीपकनी ज्योति तो मूर्तिकअचेतन छे
एवी ज्योति त्यां केम संभवे? वळी ज्योतमां ज्योत मळतां आ ज्योत रहे छे के नाश पामे
छे? जो रहे छे तो ज्योत वधती जशे; अने तेथी ज्योतिमां हीनाधिकपणुं थशे तथा जो विणसी
जाय छे तो ज्यां पोतानी ज सत्ता नाश थाय, एवुं कार्य उपादेय केम मानीए? माटे एम
पण बनतुं नथी.
एक मोक्ष एवो कहे छे के‘‘आत्मा ब्रह्म ज छे, मायानुं आवरण मटतां मुक्ति ज
छे.’’ ए पण मिथ्या छे. कारण के ते मायाना आवरणसहित हतो; त्यारे ब्रह्मथी एक हतो
पांचमो अधिकारः अन्यमत निराकरण ][ १२३