के जुदो? जो एक हतो तो ब्रह्म ज मायारूप थयो, तथा जो जुदो हतो तो माया दूर थतां
ए ब्रह्ममां मळे छे, त्यारे तेनुं अस्तित्व रहे छे के नहि? जो रहे छे तो सर्वज्ञने तो तेनुं
अस्तित्व जुदुं भासे, एटले संयोग थवाथी मळ्या भले कहो, परंतु परमार्थथी मळ्या नथी. तथा
जो अस्तित्व नथी रहेतुं, तो पोतानो ज अभाव थवो कोण इच्छे? माटे एम पण बनतुं नथी.
वळी एक प्रकारे कोई मोक्षनुं स्वरूप आ प्रमाणे पण कहे छे केः — ‘बुद्धि आदिनो
नाश थतां मोक्ष थाय छे.’’ पण ‘शरीरना अंगभूत मन – इन्द्रियने आधीन ज्ञान न रह्युं’
– ए प्रमाणे कहेवुं तो काम – क्रोधादिक दूर थतां ज बने छे तथा त्यां चेतनतानो अभाव पण
थयो मानीए; तो एवी पाषाणादि समान जड अवस्थाने भली केम मानीए? वळी रूडुं साधन
करतां तो जाणपणुं वधे छे छतां रूडुं साधन करतां जाणपणानो अभाव थवो केम मनाय?
लोकमां पण ज्ञाननी महत्ताथी जडपणानी महत्ता नथी. माटे ए पण बनतुं नथी.
ए ज प्रमाणे अनेक प्रकारनी कल्पना वडे तेओ मोक्ष बतावे छे, पण कांई यथार्थ जाणता
नथी. मात्र संसारअवस्थानी मोक्षअवस्थामां कल्पना करी पोतानी इच्छानुसार बोले छे.
ए प्रमाए वेदांतादि मतोमां अन्यथा निरूपण करे छे.
✾ £स्लाममत संबंधाी विचार ✾
वळी ए ज प्रमाणे मुसलमानोना मतनुं अन्यथापणुं निरूपण करीए छीए. जेम तेओ
ब्रह्मने सर्वव्यापी, एक निरंजन, सर्वनो कर्ता माने छे, तेम आ खुदाने माने छे. जेम तेओ
अवतार थया माने छे, तेम आ पेगंबर थया माने छे. जेम तेओ पुण्य – पापना हिसाब
लेवा तथा यथायोग्य दंडादिक देवा ठरावे छे, तेम आ खुदाने ठरावे छे. जेम तेओ गाय
आदिने पूज्य कहे छे, तेम आ सुवर आदिने कहे छे. ए बधां तिर्यंचादिक ज छे. जेम
तेओ ईश्वरनी भक्तिथी मुक्ति थवी कहे छे, तेम आ खुदानी भक्ति कहे छे. जेम तेओ
कोई ठेकाणे दयाने पोषे छे, तथा कोई ठेकाणे हिंसाने पोषे छे तेम आ पण कोई ठेकाणे
‘‘रहम्’’ (-दया) करवी पोषे छे, तथा कोई ठेकाणे ‘‘कतल’’ करवी पोषे छे. जेम तेओ कोई
ठेकाणे तपश्चरण करवुं पोषे छे, त्यारे कोई ठेकाणे विषयसेवन पोषे छे. ते ज प्रमाणे आ
पण पोषे छे. तथा जेम तेओ कोई ठेकाणे मांस, मदिरा अने शिकार आदिनो निषेध करे
छे त्यारे कोई ठेकाणे उत्तम पुरुषो द्वारा तेनो ज अंगीकार करवो बतावे छे; तेम आ पण
तेनो निषेध वा अंगीकार करवो बतावे छे; ए प्रमाणे अनेक प्रकारथी तेमां समानता छे जोके
नामादिक जुदां – जुदां छे तोपण प्रयोजनभूत अर्थनी तेमां एकता छे.
वळी इश्वर, खुदा वगेरे मूळ श्रद्धाननी तो एकता छे, पण उत्तरश्रद्धानमां घणा ज
भेदो छे, त्यां तेओथी पण विपरीतरूप विषय – कषाय – हिंसादि पापना पोषक प्रत्यक्षादि
प्रमाणथी विरुद्ध निरूपण करे छे, माटे मुसलमानोनो मत महाविपरीतरूप जाणवो.
१२४ ][ मोक्षमार्गप्रकाशक