परमात्माने सर्वनो कर्ता कहे छे, त्यां तेओ एवुं अनुमान करे छे के – ‘‘आ जगत कर्तावडे नीपज्युं
छे कारण केे – ए कार्य छे, जे कार्य छे ते कर्तावडे नीपजे छे, जेम के — घटादिक.’’ पण ए
अनुमानाभास छे. कारण के – अहीं अनुमानान्तर संभवे छे. आ जगत समस्त कर्तावडे नीपज्युं
नथी, कारण केे – एमां कोई अकार्यरूप पदार्थो पण छे. अने जे अकार्य छे, ते कर्तावडे नीपज्या
नथी, जेम के — सूर्यबिंबादिक अनेक पदार्थोना समुदायरूप जगतमां केटलाक पदार्थो कृत्रिम छे,
के जे मनुष्यादिक वडे करवामां आवे छे. तथा केटलाक अकृत्रिम छे, जेनो कोई कर्ता नथी. ए
प्रत्यक्षादि प्रमाणथी अगोचर छे, तेथी ईश्वरने कर्ता मानवो मिथ्या छे.
वळी तेओ जीवात्माने प्रत्येक भिन्न-भिन्न कहे छे, ते तो सत्य छे, परंतु मोक्ष गया
पछी पण तेमने भिन्न ज मानवा योग्य छे. विशेष तो प्रथम कह्युं ज छे. ए ज प्रमाणे तेओ
अन्य तत्त्वोने पण मिथ्या प्ररूपे छे.
प्रमाणादिकनुं स्वरूप पण अन्यथा कल्पे छे, ते जैनग्रंथोथी परीक्षा करतां भासे छे.
ए प्रमाणे नैयायिकमतमां कहेलां तत्त्व कल्पित जाणवां.
✾ वैशेषिकमत निराकरण ✾
वैशेषिकमतमां – ‘‘द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष अने समवाय — ए छ तत्त्वो कहे
छे.
तेमां द्रव्यतत्त्व – पृथ्वी, जल, अग्नि, पवन, आकाश, काल, दिशा, आत्मा अने मन ए
नव प्रकारे छे. त्यां पृथ्वी, जळ, अग्नि अने पवनना परमाणु भिन्न भिन्न छे अने ते नित्य
छे, तेनाथी कार्यरूप पृथ्वी आदि थाय छे ते अनित्य छे.’’ पण एम कहेवुं प्रत्यक्षादिकथी विरुद्ध
छे, कारण के – इंधनरूप पृथ्वी आदिनां परमाणु अग्निरूप थतां जोईए छीए, अग्निनां
परमाणुनी राखरूप पृथ्वी थती जोईए छीए, तथा जळनां परमाणु मुक्ताफल (मोती) रूप पृथ्वी
थतां जोईए छीए. तुं कहीश के – ‘‘ए परमाणु जतां रहे छे अने बीजां ज परमाणु ते रूप
थाय छे,’’ पण प्रत्यक्षने तुं असत्य ठरावे छे. कोई एवी प्रबळ युक्ति कहे तो अमे ए ज
प्रमाणे मानीए, परंतु केवळ कहेवा मात्रथी ज एम ठरे नहि. तेथी के – सर्व परमाणुओनी एक
पुद्गलरूप मूर्तिकजाति छे, ते पृथ्वी आदि अनेक अवस्थारूपे परिणमे छे.
वळी तेओ ए पृथ्वी आदिनुं कोई ठेकाणे जुदुं शरीर ठरावे छे, ते पण मिथ्या ज छे,
कारण तेनुं कोई प्रमाण नथी. पृथ्वी आदि तो परमाणुपिंड छे, एनुं शरीर अन्य ठेकाणे, अने
ए अन्य ठेकाणे एम संभवतुं ज नथी, तेथी ए मिथ्या छे. वळी ज्यां पदार्थ अटके नहि एवुं
जे पोलाण, तेने तेओ आकाश कहे छे, तथा क्षण – पळ आदिने काळ कहे छे. हवे ए बंने अवस्तु
ज छे. पण सत्तारूप पदार्थ नथी. मात्र पदार्थोना क्षेत्र – परिणमन आदिकनो पूर्वापर विचार करवा
पांचमो अधिकारः अन्यमत निराकरण ][ १२९