Moksha Marg Prakashak-Gujarati (Devanagari transliteration). Shithilacharni Poshak Yukti Ane Tenu Nirakaran.

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राखी ज नथी, तो ए समान बीजुं पाप कयुं? हवे अहीं कुयुक्तिओवडे जेओ ए कुगुरुओनुं
स्थापन करे छे, तेनुं निराकरण करीए छीए.
शिथिलाचारनी पोषक युक्ति अने तेमनुं निराकरण
प्रश्नःगुरु विना तो नगुरा कहेवाय हवे एवा गुरु आ काळमां देखाता
नथी तेथी आमने ज गुरु मानवा जोईए?
उत्तरःनगुरो तो एनुं नाम के जे गुरु ज माने नहि. हवे जे गुरुने तो माने
छे, पण आ क्षेत्रमां गुरुनुं लक्षण न देखावाथी, कोईने गुरु न माने, तो ते श्रद्धानथी तो
नगुरो थतो नथी. जेम
नास्तिक तो तेनुं नाम, के जे परमेश्वरने माने ज नहि. हवे जे
परमेश्वरने तो माने छे, पण आ क्षेत्रमां परमेश्वरनुं लक्षण क्यांय न देखावाथी कोईने परमेश्वर
न माने, तो तेथी कांई ते नास्तिक थतो नथी. ए ज प्रमाणे अहीं जाणवुं.
प्रश्नःजैनशास्त्रोमां आ काळमां केवळीनो तो अभाव कह्यो छे, पण कांई
मुनिनो अभाव कह्यो नथी?
उत्तरःएवुं तो कह्युं नथी केआ देशमां सद्भाव रहेशे, पण भरतक्षेत्रमां
रहेशे, एम कह्युं छे. हवे भरतक्षेत्र तो घणुं ज मोटुं छे, तेमां कोई ठेकाणे सद्भाव हशे,
तेथी तेनो अभाव कह्यो नथी. जो तमे रहो छो ते ज क्षेत्रमां सद्भाव मानशो, तो ज्यां
आवा पण गुरु (मुनि) नहि देखो त्यां तमे जशो, त्यारे कोने गुरु मानशो? वळी जेम आ
काळमां हंसोनो सद्भाव कह्यो छे, पण हंस देखाता नथी, तो तेथी अन्य पक्षीओमां
(कागादिमां) कांई हंसपणुं मनातुं नथी. तेम आ काळमां मुनिनो सद्भाव कह्यो छे, हवे मुनि
देखाता नथी, तो तेथी बीजाओने तो मुनि मनाय नहि.
प्रश्नःएक अक्षरदाताने गुरु मानवामां आवे छे, तो जे शास्त्र शिखवाडे,
संभळावे तेमने गुरु केम न मानीए?
उत्तरःगुरुनाम महाननुं छे, हवे जेनामां जे प्रकारनी महंतता संभव होय तेने
ते प्रकारनी गुरुसंज्ञा संभवे. जेम कुळअपेक्षाए मातापिताने गुरुसंज्ञा छे, तेम विद्या
भणाववावाळाने पण विद्या अपेक्षाए गुरुसंज्ञा छे, परंतु अहीं तो धर्मनो अधिकार छे, तेथी
जेनामां धर्म अपेक्षाए महंतता संभवित होय ते ज गुरु जाणवो. हवे धर्म नाम चारित्रनुं
छे, यथा
*
‘चरित्तं खलु धम्मो’ एम शास्त्रमां कह्युं छे, तेथी चारित्रधारकने ज गुरुसंज्ञा छे.
वळी जेम भूतादिनुं नाम पण देव छे, तोपण अहीं देवना श्रद्धानमां अरहंतदेवनुं ज ग्रहण
* श्री प्रवचनसार गाथा ७.
छठ्ठो अधिकारः कुदेव-कुगुरु-कुधर्म-निराकरण ][ १८९