Moksha Marg Prakashak-Gujarati (Devanagari transliteration).

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अहो! देव-गुरु-धर्म तो सर्वोत्कृष्ट पदार्थ छे, एना आधारे तो धर्म छे, तेमां शिथिलता
राखे तो अन्यधर्म केवी रीते थाय? तेथी घणुं शुं कहेवुं? सर्वथा प्रकारे ए कुदेव-कुगुरु-कुधर्मना
त्यागी थवुं योग्य छे.
कुदेवादिनो त्याग न करवाथी मिथ्यात्वभाव घणो पुष्ट थाय छे. अने आ काळमां अहीं
तेनी प्रवृत्ति विशेष जोवामां आवे छे, माटे अहीं तेना निषेधरूप निरूपण कर्युं छे. तेने जाणी
मिथ्यात्वभाव छोडी पोतानुं कल्याण करो.
ए प्रमाणे श्री मोक्षमार्गप्रकाशक नामना शास्त्रमां कुदेव-कुगुरु
-कुधर्म निषेध वर्णनरूप छठ्ठो अधिकार समाप्त
छठ्ठो अधिकारः कुदेव-कुगुरु-कुधर्म-निराकरण ][ १९७