Moksha Marg Prakashak-Gujarati (Devanagari transliteration).

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सातमो अधिकारः जैनमतानुयायी मिथ्याद्रष्टिओनुं स्वरूप ][ २२१
उत्तरःमोक्षमार्गमां देवगुरुधर्म, जीवादि तत्त्व तथा बंधमोक्षमार्ग प्रयोजन
भूत छे, माटे तेनी तो परीक्षा अवश्य करवी अने जे शास्त्रोमां ए सत्य कह्यां होय तेनी
सर्व आज्ञा मानवी, तथा जेमां ए अन्यथा प्ररूप्या होय तेनी आज्ञा न मानवी.
जेम लोकमां जे पुरुष प्रयोजनभूत कार्योमां जूठ बोलतो नथी ते प्रयोजनरहित कार्यमां
केवी रीते जूठ बोलशे? तेम जे शास्त्रोमां प्रयोजनभूत देवादिकनुं स्वरूप अन्यथा कह्युं नथी,
तेमां प्रयोजनरहित द्वीपसमुद्रादिनुं कथन अन्यथा केवी रीते होय? कारण के
देवादिकनुं कथन
अन्यथा करतां तो वक्ताना विषयकषाय पोषाय छे.
प्रश्नःविषयकषायवश देवादिकनुं कथन तो अन्यथा कर्युं, पण ते ज
शास्त्रोमां बीजां कथन अन्यथा शामाटे कर्यां?
उत्तरःजो एक ज कथन अन्यथा करे तो तेनुं अन्यथापणुं तुरत ज प्रगट थई
जाय, तथा जुदी पद्धति ठरे नहि; ते माटे घणां कथन अन्यथा करवाथी जुदी पद्धति ठरे.
त्यां तुच्छबुद्धि भ्रममां पडी जाय छे के
‘आ पण मत छे आ पण मत छे,’ एटला माटे
प्रयोजनभूतनुं अन्यथापणुं भेळववा अर्थे अप्रयोजनभूत पण अन्यथा कथन घणां कर्यां, तथा
प्रतीति कराववा अर्थे कोई कोई साचा कथन पण कर्यां, परंतु चतुर होय ते भ्रममां पडे नहि,
प्रयोजनभूत कथननी परीक्षा करी जेमां सत्य भासे ते मतनी सर्व आज्ञा माने.
एवी परीक्षा करतां एक जैनमत ज सत्य भासे छेअन्य नहि, कारण केएना
वक्ता श्री सर्वज्ञवीतराग छे, तेओ जूठ शामाटे कहे? ए प्रमाणे जिनआज्ञा मानवाथी जे
सत्यश्रद्धान थाय तेनुं नाम आज्ञासम्यक्त्व छे. तथा त्यां एकाग्रचिंतवन होवाथी तेनुं ज नाम
आज्ञाविचय धर्मध्यान छे.
जो एम न मानीए अने परीक्षा कर्या विना मात्र आज्ञा मानवाथी सम्यक्त्व वा
धर्मध्यान थई जाय तो जे द्रव्यलिंगी आज्ञा मानी मुनि थयो छे, तथा आज्ञानुसार साधनवडे
ग्रैवेयक सुधी जाय छे, तेने मिथ्याद्रष्टिपणुं केवी रीते रह्युं? माटे कंईक परीक्षा करी, आज्ञा
मानवाथी ज सम्यक्त्व वा धर्मध्यान थाय छे. लोकमां पण कोई प्रकारथी परीक्षा करीने ज
पुरुषनी प्रतीति करे छे.
वळी तें कह्युं केजिनवचनमां संशय करवाथी सम्यक्त्वमां शंका नामनो दोष थाय
छे, पण ‘‘न मालूम आ केम हशे? एवुं मानी निर्णय न करीए त्यां शंका नामनो दोष
थाय, तथा जो निर्णय करवा माटे विचार करतां ज सम्यक्त्वमां दोष लागे तो अष्टसहस्रीमां
आज्ञाप्रधानी करतां परीक्षाप्रधानीने उत्तम शामाटे कह्यो? पृच्छना आदिने स्वाध्यायनां अंग
केवी रीते कह्यां? प्रमाण
नयवडे पदार्थोनो निर्णय करवानो उपदेश शामाटे आप्यो? माटे
परीक्षा करी आज्ञा मानवी योग्य छे.