२२६ ][ मोक्षमार्गप्रकाशक
परंतु तेना गुण – अवगुणनी परीक्षा करता नथी अथवा परीक्षा पण जो करे छे, तो
तत्त्वज्ञानपूर्वक साची परीक्षा करता नथी पण मात्र बाह्यलक्षणो वडे परीक्षा करे छे, अने एवी
प्रतीतिवडे तेओ सुदेव – गुरु – शास्त्रनी भक्तिमां प्रवर्ते छे. ते अहीं कहीए छीए —
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जैनाभासानीे सुदेव-गुरु-शास्त्र भकितनुं मिथ्यापणुं ✾
देवभकितनुं अन्यथारुप
अर्हंतदेव छे, इन्द्रादि द्वारा पूज्य छे, अनेक अतिशय सहित छे, क्षुधादिदोष रहित
छे, शरीरनी सुंदरताने धारण करे छे; स्त्रीसंगमादिथी रहित छे, दिव्यध्वनिवडे उपदेश आपे
छे, केवलज्ञानवडे लोकालोकने जाणे छे, तथा जेणे काम – क्रोधादि नाश कर्या छे – इत्यादि विशेषण
कहे छे; तेमां केटलाक विशेषण तो पुद्गलाश्रित छे तथा केटलाक विशेषण जीवाश्रित छे, तेने
भिन्न – भिन्न ओळखतो नथी. जेम कोई असमानजातीय मनुष्यादि पर्यायोमां भिन्नता न
जाणी मिथ्याद्रष्टिने धारण करे छे तेम आ पण असमानजातीय अरहंतपर्यायमां जीव –
पुद्गलनां विशेषणोने भिन्न न जाणी मिथ्याद्रष्टिपणुं धारण करे छे.
वळी जे बाह्य विशेषणो छे तेने तो जाणी तेनाथी अरहंतदेवनुं महानपणुं विशेष माने
छे, अने जे जीवनां विशेषणो छे तेने यथावत् न जाणतां ए वडे अरहंतदेवनुं महानपणुं
आज्ञानुसार माने छे अथवा अन्यथा माने छे. जो जीवनां यथावत् विशेषणो जाणे तो
मिथ्याद्रष्टि रहे नहि.
वळी ते अरहंतोने स्वर्ग – मोक्षदाता, दीनदयाळ, अधमोद्धारक अने पतित – पावन माने
छे, ते तो जेम अन्यमतीओ कर्तुत्वबुद्धिथी ईश्वरने माने छे, तेम आ पण अरहंतने माने छे,
पण एम नथी जाणतो के – फळ तो पोताना परिणामोनुं लागे छे. तेने अरहंत तो निमित्तमात्र
छे, तेथी उपचारथी ए विशेषणो संभवे छे.
पोताना परिणाम शुद्ध थया विना अरहंत पण स्वर्ग मोक्षादि दाता नथी. वळी
अरहंतादिकना नामादिकथी श्वानादिके स्वर्ग प्राप्त कर्युं त्यां ते नामादिनो ज अतिशय माने छे,
पण परिणाम विना नाम लेवावाळाने पण स्वर्गप्राप्ति न थाय तो सांभळवावाळाने तो क्यांथी
थाय? नाम सांभळवाना निमित्तथी ए श्वानादिकने जे मंदकषायरूप भाव थया, तेनुं फळ तेने
स्वर्गप्राप्ति थई छे, उपचारथी त्यां नामनी मुख्यता करी छे.
वळी अरहंतादिना नाम – पूजनादिकथी अनिष्ट सामग्रीनो नाश तथा इष्ट सामग्रीनी
प्राप्ति थवी मानी, रोगादि मटाडवा वा धनादिनी प्राप्ति अर्थे तेनुं नाम ले छे वा पूजनादि
करे छे. पण इष्ट – अनिष्टना कारण तो पूर्वकर्मनो उदय छे, अरहंत तो कर्ता नथी,
अरहंतादिकनी भक्तिरूप शुभोपयोग परिणामोथी पूर्व पापनुं संक्रमणादि थई जाय छे, माटे