Moksha Marg Prakashak-Gujarati (Devanagari transliteration).

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२४६ ][ मोक्षमार्गप्रकाशक
साचा धर्मनी तो आ आम्नाय छे केजेटला पोताना रागादिक दूर थया होय ते
अनुसार जे पदमां जे धर्मक्रिया संभवे ते बधी अंगीकार करे, जो थोडा रागादिक मट्या होय
तो नीचा ज पदमां प्रवर्ते, परंतु उच्चपद धरावी नीची क्रिया न करे.
प्रश्नःस्त्रीसेवनादिनो त्याग उपरनी प्रतिमामां कह्यो छे तो नीचली अवस्थावाळो
तेनो त्याग करे के न करे?
उत्तरःनीचली अवस्थावाळो तेनो सर्वथा त्याग करी शकतो नथी, कोई दोष लागे
छे तेथी उपरनी प्रतिमामां तेनो त्याग कह्यो छे, पण नीचली अवस्थामां जे प्रकारथी त्याग
संभवे तेवो त्याग नीचली अवस्थावाळो पण करे, परंतु जे नीचली अवस्थामां जे कार्य संभवे
ज नहि तेवो त्याग करवो तो कषायभावोथी ज थाय छे. जेम कोई सात व्यसन तो सेवे
अने स्वस्त्रीनो त्याग करे ए केम बने? जोके स्वस्त्रीनो त्याग करवो ए धर्म छे, तोपण पहेलां
सात व्यसननो त्याग थाय त्यारे ज स्वस्त्रीनो त्याग करवो योग्य छे. ए ज प्रमाणे अन्य
पण समजवुं.
वळी सर्वप्रकारथी धर्मना स्वरूपने नहि जाणता एवा केटलाक जीवो, कोई धर्मना
अंगने मुख्य करी अन्य धर्मोने गौण करे छे. जेम कोई जीवदया धर्मने मुख्य करी पूजा
प्रभावनादि कार्योने उथापे छे, कोई पूजाप्रभावनादि धर्मने मुख्य करी हिंसादिकनो भय
राखता नथी, केटलाक तपनी मुख्यता करी आर्तध्यानादि करीने पण उपवासादिक करे छे वा
पोताने तपस्वी मानी निःशंक क्रोधादिक करे छे, केटलाक दाननी मुख्यता करी घणां पाप करीने
पण धन उपजावी दान आपे छे, केटलाक आरंभत्यागनी मुख्यता करी याचना आदि करवा
लागी जाय छे, तथा केटलाक जीवहिंसा मुख्य करी जळवडे स्नान
शौचादिक करता नथी वा
लौकिक कार्य आवतां धर्म छोडीने पण त्यां लागी जाय छे, इत्यादि प्रकारथी कोई धर्मने मुख्य
करी अन्य धर्मने गणता नथी वा तेने आश्रये पाप पण आचरे छे. जेम कोई अविवेकी
व्यापारीने कोई व्यापारना नफा अर्थे अन्य प्रकारथी घणो तोटो थाय छे तेवुं आ कार्य थयुं.
जेम विवेकी व्यापारीनुं प्रयोजन नफो छे तेथी ते सर्व विचार करी जेम नफो घणो
थाय तेम करे; तेम ज्ञानीनुं प्रयोजन वीतरागभाव छे, तेथी ते सर्व विचार करी जेम
वीतरागभाव घणो थाय तेम करे, कारण के मूळधर्म वीतरागभाव छे.
ए प्रमाणे अविवेकी जीव अन्यथा धर्म अंगीकार करे छे तेथी तेमने तो सम्यक्-
चारित्रनो आभास पण होतो नथी.
वळी कोई जीव अणुव्रतमहाव्रतादिरूप यथार्थ आचरण करे छे तथा आचरणानुसार
ज परिणाम छे, कोई मायालोभादिक अभिप्राय नथी; एने धर्म जाणी मोक्ष अर्थे तेनुं साधन