नित्यबद्धपरिकराः उपबृंहणस्थितिकरणवात्सल्यप्रभावनां भावयमाना वारंवारमभिवर्धितोत्साहाः ज्ञानाचरणाय
स्वाध्यायकालमवलोकयन्तो, बहुधा विनयं प्रपंचयन्तः, प्रविहितदुर्धरोपधानाः, सुष्ठुबहुमानमातन्वन्तो, निन्हवापत्तिं
नितरां निवारयन्तोऽर्थव्यञ्जनतदुभयशुद्धौ नितान्तसावधानाः, चारित्राचरणाय हिंसानृतस्तेयाब्रह्मपरिग्रह-
समस्तविरतिरुपेषु पंचमहाव्रतेषु तन्निष्ठवृत्तयः, सम्यग्योगनिग्रहलक्षणासु गुप्तिषु नितान्तं गृहीतोद्योगा,
ईर्याभाषैषणादाननिक्षेपोत्सर्गरुपासु समितिध्वत्यन्तानिवेशितप्रयत्नास्तपआचरणायानशनावमौदर्यवृत्तयः वृत्तिपरिसंख्या-
नरसपरित्यागविविक्तशैयासनकायक्लेशेष्वभीक्ष्णामुत्सहमानाः, प्रायश्चितविनयवैयावृत्यव्युत्सर्गस्वाध्यायध्यानपरिकरां-
कुशितस्वान्ता; वीर्याचरणाय कर्मकाण्डे सर्वशक्त्या व्याप्रियमाणाः, कर्मचेतनाप्रधानत्वदूरनिवारिता-
ऽशुभकर्मप्रवृत्तोऽपि, समुपात्तशुभकर्मप्रवृत्तयः, सकलक्रियाकाण्डाडम्बरोत्तीर्णदर्शनज्ञानचारित्रैक्यपरिणतिरूपां,
ज्ञानचेतनांमनागप्यसंभावयन्तः; प्रभूतपुण्यभारमन्थरितचित्तवृत्तियः, सुरलोकादिक्लेशप्राप्तिपरम्परया सुचिरं
संसारसागरेभ्रमंतीति
अनेक प्रकारनी बुद्धि करे छे, घणा द्रव्यश्रुतना पठनपाठनादि संस्कारोथी नानाप्रकारना विकल्पजाळोथी
कलंकित अंतरंग वृत्तिने धारण करे छे, अनेक प्रकार यतिनुं द्रव्यलिंग के जे बाह्यव्रत
अंशथी तेओ कोई वेळा पुण्यक्रियामां रुचि करे छे, कोई काळमां दयावंत थाय छे, कोई काळमां अनेक
विकल्पो उपजावे छे, कोई काळमां कांईक आचरण करे छे, कोई काळमां दर्शनना आचरण अर्थे समताभाव
धरे छे, कोई काळमां वैराग्यदशाने धारण करे छे, कोई काळमां अनुकंपा धारण करे छे, कोई काळमां
धर्म प्रत्ये आस्तिक्यभाव धारण करे छे, शुभोपयोग प्रवृत्तिथी शंका, कांक्षा, विचिकित्सा अने मूढद्रष्टि
आदि भावोना उत्थापन अर्थे सावधान थई प्रवर्ते छे, केवल व्यवहारनयरूप, उपबृंहण, स्थितिकरण,
वात्सल्य अने प्रभावनादि अंगोनी भावना चिंतवे छे, वारंवार उत्साहने वधारे छे, ज्ञानभावना अर्थे
पठन
अक्षर तथा अर्थ अने अक्षरनी एक काळमां एकतानी शुद्धतामां सावधान रहे छे, चारित्र धारण करवा
अर्थे हिंसा, असत्य, चोरी, स्त्रीसेवन अने परिग्रह ए पांच अधर्मोना सर्वथा त्यागरूप पंचमहाव्रतमां
स्थिरवृत्ति धारण करे छे, मन
सर्वशक्तिपूर्वक प्रवर्ते छे, कर्मचतेनानी प्रधानतापूर्वक सर्वथा निवारण करी छे अशुभ कर्मनी प्रवृत्ति जेणे
ते ज शुभकर्मनी प्रवृत्तिनो अंगीकार करे छे तथा संपूर्ण क्रियाकांडना आडंबरथी गर्भित एवा जीवो