२६४ ][ मोक्षमार्गप्रकाशक
✾ सम्यक्त्वसन्मुख मिथ्याद्रष्टिनुं निरुपण ✾
कोई मंदकषायादिनुं कारण पामीने ज्ञानावरणादि कर्मोनो क्षयोपशम थयो, तेथी
तत्त्वविचार करवानी शक्ति प्रगट थई, तथा मोह मंद थयो तेथी तत्त्वविचारमां उद्यमी थयो,
अने बाह्यनिमित्त देव – गुरु – शास्त्रादिकनुं थतां ए वडे सत्य उपदेशनो लाभ थयो.
त्यां पोताना प्रयोजनभूत मोक्षमार्गना, देव – गुरु – धर्मादिकना, जीवादितत्त्वोना, स्व –
परना वा पोताने अहितकारी – हितकारी भावोना, इत्यादिना उपदेशथी सावधान थई एवो
विचार कर्यो के – अहो! मने तो आ वातनी खबर ज नथी, हुं भ्रमथी भूली प्राप्त पर्यायमां
ज तन्मय थयो, पण आ पर्यायनी तो थोडा ज काळनी स्थिति छे, अहीं मने सर्व निमित्तो
मळ्यां छे माटे मारे आ वातनो बराबर निर्णय करवो जोईए कारण के, आमां तो मारुं
ज प्रयोजन भासे छे; एम विचारी जे उपदेश सांभळ्यो तेनो निर्धार करवानो उद्यम कर्यो.
त्यां उद्देश, लक्षणनिर्देश अने परीक्षा वडे तेनो निर्धार थाय छे माटे प्रथम तो तेनां
देव – गुरु – शास्त्रना उद्देश एटले नाम जाणे लक्षणथी ओळखे, नाम शीखे ते उद्देश, पछी तेनां
लक्षण जाणे, पछी आम संभवे छे के नहि? एवा विचारपूर्वक परीक्षा करवा लागे.
हवे त्यां नाम शीखी लेवां तथा लक्षण जाणी लेवां ए बंने तो उपदेशानुसार थाय
छे; जेवो उपदेश मळ्यो होय तेवो याद करी लेवो, तथा परीक्षा करवामां पोतानो विवेक
जोईए, एटले विवेकपूर्वक एकांतमां पोताना उपयोगमां विचार करे के – ‘जेम उपदेश आप्यो
तेम ज छे के अन्यथा छे’ तेनो अनुमानादि प्रमाणवडे यथार्थ निर्णय करे, वा ‘उपदेश तो
आम छे, तथा आम न मानीए तो आम थाय,’ हवे तेमां प्रबळयुक्ति कई छे तथा
निर्बळयुक्ति कई छे? जे प्रबळ भासे तेने सत्य जाणे; वळी जो ए उपदेशथी अन्यथा सत्य
भासे वा तेमां संदेह रहे, निर्धार न थाय तो जे कोई विशेष ज्ञानी होय तेने पूछे, अने
ते जे उत्तर आपे तेनो विचार करे. ए प्रमाणे ज्यांसुधी निर्धार न थाय त्यांसुधी प्रश्न –
उत्तर करे अथवा समानबुद्धिना धारक होय तेमने पोतानो जेवो विचार थयो होय तेवो कहे,
तेमनी साथे प्रश्न – उत्तर द्वारा परस्पर चर्चा करे, ए प्रश्नोत्तरमां जे निरूपण थयुं होय तेनो
एकांतमां विचार करे, ए प्रमाणे ज्यांसुधी पोताना अंतरंगमां जेवो उपदेश आप्यो हतो तेवो
ज निर्णय थई तेनो भाव न भासे त्यांसुधी एवो ज उद्यम कर्या करे.
वळी अन्यमतीओ द्वारा जे कल्पित तत्त्वोनो उपदेश आप्यो छे ते वडे जैन उपदेश
अन्यथा भासे, तेमां संदेह थाय, तोपण उपर कह्या प्रमाणे उद्यम करे.
ए प्रमाणे उद्यम करतां, ‘जेवो श्री जिनदेवनो उपदेश छे तेम ज सत्य छे, मने पण
एम ज भासे छे’ एवो निर्णय थाय छे; कारण के जिनदेव अन्यथावादी नथी.