Moksha Marg Prakashak-Gujarati (Devanagari transliteration).

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२६८ ][ मोक्षमार्गप्रकाशक
३. श्री जिनेन्द्रदेवद्वारा उपदेशेला तत्त्वनुं धारण थवुं, तेनो विचार थवो ते देशनालब्धि
छे. नर्कादिकमां ज्यां उपदेशनुं निमित्त न होय त्यां ते पूर्वसंस्कारथी थाय छे.
४. कर्मोनी पूर्वसत्ता घटी अने अंतःकोडाकोडीसागर प्रमाण रही जाय तथा नवीनबंध
पण अंतःकोडाकोडीसागर प्रमाणे संख्यातमा भागमात्र थाय, ते पण ए लब्धिकाळथी मांडीने
क्रमथी घटतो ज जाय अने केटलीक पापप्रकृतिओनो बंध क्रमथी मटतो जाय; इत्यादि योग्य
अवस्था थवी तेनुं नाम प्रायोग्यलब्धि छे.
ए चारे लब्धि भव्य तथा अभव्य बंनेने होय छे. ए चार लब्धिओ थया पछी
सम्यक्त्व थाय तो थाय अने न थाय तो न पण थाय एम श्री *लब्धिसार गाथा ३ मां
कह्युं छे, माटे ए तत्त्वविचारवाळाने सम्यक्त्व होवानो नियम नथी. जेम कोईने हितशिक्षा
आपी, तेने जाणी ते विचार करे के आ शिक्षा आपी ते केवी रीते छे? पछी विचार करतां
तेने
‘आम ज छे’ एवी ते शिक्षानी प्रतीति थई जाय, अथवा अन्यथा विचार थाय, वा
अन्य विचारमां लागी ते शिक्षानो निर्धार न करे तो तेने प्रतीति न पण थाय; तेम श्रीगुरुए
तत्त्वोपदेश आप्यो तेने जाणी विचार करे के
आ उपदेश आप्यो ते केवी रीते छे? पछी विचार
करतां तेने ‘आम ज छे’ एवी शिक्षानी प्रतीति थई जाय, अथवा अन्यथा विचार थाय, अथवा
अन्य विचारमां लागी ते उपदेशनो निर्धार न करे तो प्रतीति न पण थाय. पण तेनो उद्यम
तो मात्र तत्त्वविचार करवानो ज छे.
५. पांचमी करणलब्धि थतां सम्यक्त्व अवश्य थाय ज एवो नियम छे. पण ते तो
जेने पूर्वे कहेली चार लब्धिओ थई होय अने अंतर्मुहूर्त पछी जेने सम्यक्त्व थवानुं होय
ते ज जीवने करणलब्धि थाय छे.
ए करणलब्धिवाळा जीवने बुद्धिपूर्वक तो एटलो ज उद्यम होय छे केते
तत्त्वविचारमां उपयोगने तद्रूप थई लगावे तेथी समये समये तेना परिणाम निर्मळ थता
जाय छे. जेम कोईने शिक्षानो विचार एवो निर्मळ थवा लाग्यो के जेथी तेने शिक्षानी प्रतीति
तुरत ज थई जशे, तेम तत्त्व उपदेशनो विचार एवो निर्मळ थवा लाग्यो के जेथी तेने तेनुं
तुरत ज श्रद्धान थई जाय, वळी ए परिणामोनुं तारतम्य केवळज्ञानवडे देख्युं तेनुं
करणानुयोगमां निरूपण कर्युं छे.
ए करणलब्धिना त्रण भेद छेअधःकरण, अपूर्वकरण अने अनिवृत्तिकरण; तेनुं
विशेष व्याख्यान तो श्री लब्धिसार शास्त्रमां कर्युं छे त्यांथी जाणवुं, अहीं संक्षेपमां कहीए
छीए
त्रिकाळवर्ती सर्व करणलब्धिवाळा जीवोना परिणामोनी अपेक्षाए ए त्रण नाम छे, तेमां
करणनाम तो परिणामनुं छे.