Moksha Marg Prakashak-Gujarati (Devanagari transliteration).

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३०६ ][ मोक्षमार्गप्रकाशक
उपदेश तो वचनात्मक छे अने वचनद्वारा अनेक अर्थ एकसाथे कह्या जता नथी, माटे उपदेश
तो कोई एक ज अर्थनी मुख्यतापूर्वक होय छे.
जे अर्थनुं ज्यां वर्णन चाले छे त्यां तेनी ज मुख्यता छे, जो बीजा अर्थनी त्यां ज
मुख्यता करवामां आवे तो बंने उपदेश द्रढ न थाय, तेथी उपदेशमां एक अर्थने द्रढ करवामां
आवे छे, परंतु सर्व जिनमतनुं चिह्न स्याद्वाद छे, ‘स्यात्’ पदनो अर्थ ‘कथंचित्’ छे, माटे
जे उपदेश होय तेने सर्वथा न जाणी लेवो. उपदेशना अर्थने जाणी त्यां आटलो विचार करवो
के
‘आ उपदेश कया प्रकारे छे, कया प्रयोजनसहित छे अने कया जीवने कार्यकारी छे’ इत्यादि
विचार करी तेना यथार्थ अर्थने ग्रहण करवो, पछी पोतानी दशा देखे; ए उपदेश जेम पोताने
कार्यकारी थाय ते प्रमाणे तेने पोते अंगीकार करे, तथा जे उपदेश जाणवा योग्य ज होय
तो तेने यथार्थ जाणी ले, ए प्रमाणे उपदेशना फळने प्राप्त करे.
प्रश्नःजो अल्पबुद्धिवान एटलो विचार न करी शके तो ते शुं करे?
उत्तरःजेम व्यापारी पोतानी बुद्धि अनुसार जेमां नफो समजे ते थोडो वा घणो
व्यापार करे परंतु नफातोटानुं ज्ञान तो अवश्य जोईए; तेम विवेकी पुरुष पोतानी बुद्धि
अनुसार जेमां पोतानुं हित समजे ते थोडो वा घणो उपदेश ग्रहण करे परंतु ‘मने आ
कार्यकारी छे, आ कार्यकारी नथी’ एटलुं ज्ञान तो अवश्य जोईए. हवे
कार्य तो एटलुं छे
केयथार्थ श्रद्धानज्ञानवडे रागादिक घटाडवा, ए कार्य पोताने जेम सधाय ते ज उपदेशनुं
प्रयोजन ग्रहण करे, विशेष ज्ञान न होय तोपण प्रयोजनने तो भूले नहि, ए सावधानता
तो अवश्य जोईए, जेमां पोताना हितनी हानि थाय तेम उपदेशनो अर्थ समजवो योग्य नथी.
ए प्रमाणे स्याद्वादद्रष्टिसहित जैनशास्त्रोनो अभ्यास करवाथी पोतानुं कल्याण थाय छे.
प्रश्नःज्यां अन्य अन्य प्रकार संभवे त्यां तो स्याद्वाद संभवे पण एक
ज प्रकारथी शास्त्रोमां विरुद्धता भासे तो त्यां शुं करीए? जेम प्रथमानुयोगमां एक
तीर्थंकरनी साथे हजारो मुनि मोक्ष गया बताव्या छे; करणानुयोगमां छ महिना अने
आठ समय छसो आठ जीव मोक्ष जाय एवो नियम कहेल छे; प्रथमानुयोगमां एवुं
कथन कर्युं के
देवदेवांगना ऊपजीने पछी मरण पामी साथे ज मनुष्यादि पर्यायमां
ऊपजे छे, त्यारे करणानुयोगमां देवनुं आयुष्य सागरोप्रमाण अने देवांगनानुं आयु
पल्योपप्रमाण कह्युं छे. इत्यादि विधि केवी रीते मळे?
उत्तरःकरणानुयोगमां जे कथनो छे ते तो तारतम्यसहित छे पण अन्य
अनुयोगमां प्रयोजन अनुसार कथनो छे; माटे करणानुयोगनां कथनो तो जेम कर्यां छे तेम
ज छे पण बीजा अनुयोगना कथननी जेम विधि मळे तेम मेळवी लेवी. ज्यां हजारो मुनि