नथी पण दुःखी ज रहे छे; माटे संसारअवस्था हितकारी नथी.
मोक्ष अवस्था ज हितकारी छे. पहेलां पण संसार अवस्थाना दुःखनुं तथा मोक्ष अवस्थाना
सुखनुं विशेष वर्णन कर्युं छे ते मात्र आ ज प्रयोजन अर्थे कर्युं छे,
ते कहो. जो पहेलां बेउ कारणो मळतां बने छे तो तमे अमने उपदेश शामाटे आपो
छो? तथा जो पुरुषार्थथी बने छे तो सर्व उपदेश सांभळे छे छतां तेमां कोई उपाय
करी शके छे तथा कोई नथी करी शकता तेनुं शुं कारण?
त्रण कारण कह्यां तेमां काळलब्धि वा होनहार (भवितव्य) तो कोई वस्तु नथी, जे काळमां
कार्य बने छे ते ज काळलब्धि तथा जे कार्य थयुं ते ज होनहार. तथा जे कर्मना उपशमादिक
छे ते तो पुद्गलनी शक्ति छे, तेनो कर्ताहर्ता आत्मा नथी, तथा पुरुषार्थथी उद्यम करे छे
ते आ आत्मानुं कार्य छे माटे आत्माने पुरुषार्थथी उद्यम करवानो उपदेश दे छे.
कार्यसिद्धि थाय अथवा न पण थाय ते कारणरूप उद्यम करे त्यां अन्य कारण मळे तो कार्यसिद्धि
थाय, न मळे तो न थाय.
भवितव्य पण थई चूक्यां तथा कर्मनां उपशमादि थयां छे तो ते आवो उपाय करे छे, माटे
जे पुरुषार्थवडे मोक्षनो उपाय करे छे तेने सर्व कारणो मळे छे अने अवश्य मोक्षनी प्राप्ति
थाय छे, एवो निश्चय करवो. तथा जे जीव पुरुषार्थवडे मोक्षनो उपाय करतो नथी तेने तो
काळलब्धि अने भवितव्य पण नथी, अने कर्मनां उपशमादि थयां नथी तेथी ते उपाय करतो