Moksha Marg Prakashak-Gujarati (Devanagari transliteration). Purusharththi Ja Moksha Prapti.

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३१४ ][ मोक्षमार्गप्रकाशक
संसार-अवस्थामां पुण्यना उदयथी इन्द्र-अहमिन्द्रादि पद पामे तोपण तेने निराकुळता थती
नथी पण दुःखी ज रहे छे; माटे संसारअवस्था हितकारी नथी.
बीजुं, मोक्ष अवस्थामां कोई पण प्रकारनी आकुळता रही नथी, माटे त्यां आकुळता
मटाडवाना उपाय करवानुं पण प्रयोजन नथी अने सदाकाळ शांतरसवडे ते सुखी रहे छे माटे
मोक्ष अवस्था ज हितकारी छे. पहेलां पण संसार अवस्थाना दुःखनुं तथा मोक्ष अवस्थाना
सुखनुं विशेष वर्णन कर्युं छे ते मात्र आ ज प्रयोजन अर्थे कर्युं छे,
तेने पण विचारी मोक्षने
हितरूप जाणी एक मोक्षनो उपाय करवो ए ज सर्व उपदेशनुं तात्पर्य छे.
पुरुषार्थथी ज मोक्षप्राप्ति
प्रश्नःमोक्षनो उपाय काळलब्धि आवतां भवितव्यानुसार बने छे के
मोहादिकनो उपशमादिक थतां बने छे, के पोताना पुरुषार्थथी उद्यम करतां बने छे?
ते कहो. जो पहेलां बेउ कारणो मळतां बने छे तो तमे अमने उपदेश शामाटे आपो
छो? तथा जो पुरुषार्थथी बने छे तो सर्व उपदेश सांभळे छे छतां तेमां कोई उपाय
करी शके छे तथा कोई नथी करी शकता तेनुं शुं कारण?
उत्तरःएक कार्य थवामां अनेक कारणो मळे छे. मोक्षनो उपाय बने छे त्यां तो
पूर्वोक्त त्रण कारणो मळे छे तथा नथी बनतो त्यां ए त्रणे कारणो नथी मळता; पूर्वोक्त
त्रण कारण कह्यां तेमां काळलब्धि वा होनहार (भवितव्य) तो कोई वस्तु नथी, जे काळमां
कार्य बने छे ते ज काळलब्धि तथा जे कार्य थयुं ते ज होनहार. तथा जे कर्मना उपशमादिक
छे ते तो पुद्गलनी शक्ति छे, तेनो कर्ताहर्ता आत्मा नथी, तथा पुरुषार्थथी उद्यम करे छे
ते आ आत्मानुं कार्य छे माटे आत्माने पुरुषार्थथी उद्यम करवानो उपदेश दे छे.
हवे आ आत्मा जे कारणथी कार्यसिद्धि अवश्य थाय ते कारणरूप उद्यम करे त्यां तो
अन्य कारणो अवश्य मळे ज अने कार्यनी सिद्धि पण अवश्य थाय ज, तथा जे कारणथी
कार्यसिद्धि थाय अथवा न पण थाय ते कारणरूप उद्यम करे त्यां अन्य कारण मळे तो कार्यसिद्धि
थाय, न मळे तो न थाय.
हवे जिनमतमां जे मोक्षनो उपाय कह्यो छे तेनाथी तो मोक्ष अवश्य थाय ज, माटे
जे जीव श्रीजिनेश्वरना उपदेश अनुसार पुरुषार्थथी मोक्षनो उपाय करे छे तेने काळलब्धि वा
भवितव्य पण थई चूक्यां तथा कर्मनां उपशमादि थयां छे तो ते आवो उपाय करे छे, माटे
जे पुरुषार्थवडे मोक्षनो उपाय करे छे तेने सर्व कारणो मळे छे अने अवश्य मोक्षनी प्राप्ति
थाय छे, एवो निश्चय करवो. तथा जे जीव पुरुषार्थवडे मोक्षनो उपाय करतो नथी तेने तो
काळलब्धि अने भवितव्य पण नथी, अने कर्मनां उपशमादि थयां नथी तेथी ते उपाय करतो