Moksha Marg Prakashak-Gujarati (Devanagari transliteration).

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नवमो अधिकार ][ ३३१
छे, ते निमित्तथी अरहंतदेवादिकनुं पण श्रद्धान थाय छे माटे सम्यग्दर्शनमां देवादिकना
श्रद्धाननो नियम छे.
प्रश्नःकेटलाक जीव अरहंतादिकनुं श्रद्धान करे छे, तेना गुणोने ओळखे छे
छतां तेने तत्त्वश्रद्धानरूप सम्यक्त्व होतुं नथी, माटे जेने साचुं अरहंतादिकनुं श्रद्धान
होय तेने तत्त्वश्रद्धान अवश्य होय ज, एवो नियम संभवतो नथी?
उत्तरःतत्त्वश्रद्धान विना अरहंतादिकना छेतालीस आदि गुणो ते जाणे छे ते
पर्यायाश्रित गुणो जाणे छे, पण जुदा जुदा जीवपुद्गलमां जेम ए संभवे छे तेम यथार्थ
ओळखतो नथी तेथी साचुं श्रद्धान पण थतुं नथी. कारण के जीवअजीवनी जाति ओळख्या
विना अरहंतादिकना आत्माश्रित गुणो अने शरीराश्रित गुणोने ते भिन्न भिन्न जाणतो नथी;
जो जाणे तो ते पोताना आत्माने परद्रव्यथी भिन्न केम न माने? तेथी ज श्री प्रवचनसारमां
कह्युं छे के
जो जाणदि अरहंतं दव्वत्तगुणत्तपज्जयत्तेहिं
सो जाणदि अप्पाणं मोहो खलु जादि तस्स लयं ।।८०।।
अर्थःजे अरहंतने द्रव्यत्व, गुणत्व अने पर्यायत्ववडे जाणे छे, ते आत्माने जाणे
छे अने तेनो मोह नाशने प्राप्त थाय छे. माटे जेने जीवादितत्त्वोनुं श्रद्धान नथी, तेने
अरहंतादिकनुं पण साचुं श्रद्धान नथी. वळी ते मोक्षादिक तत्त्वोना श्रद्धान विना अरहंतादिनुं
माहात्म्य पण यथार्थ जाणतो नथी, (मात्र) लौकिक अतिशयादिने अरहंतनुं, तपश्चरणादिवडे
गुरुनुं अने परजीवोनी अहिंसादिवडे धर्मनुं माहात्म्य जाणे छे, पण ए तो पराश्रितभाव छे
अने अरहंतादिनुं स्वरूप तो आत्माश्रित भावोवडे तत्त्वश्रद्धान थतां ज जणाय छे, माटे जेने
अरहंतादिकनुं साचुं श्रद्धान होय तेने तत्त्वश्रद्धान अवश्य होय ज एवो नियम जाणवो.
ए प्रमाणे सम्यक्त्वनुं लक्षणनिर्देश कर्युं.
प्रश्नःसाचुं तत्त्वार्थश्रद्धान, वा स्वपरनुं श्रद्धान, वा आत्मश्रद्धान, वा
देवगुरुधर्मनुं श्रद्धान सम्यक्त्वनुं लक्षण कह्युं अने ए सर्व लक्षणोनी परस्पर एकता
पण दर्शावी ते जाणी, परंतु आम अन्य अन्य प्रकारथी लक्षण कहेवानुं शुं प्रयोजन?
उत्तरःए चार लक्षणो कह्यां तेमां साची द्रष्टिवडे (कोई) एक लक्षण ग्रहण करतां
चारे लक्षणोनुं ग्रहण थाय छे, तोपण मुख्य प्रयोजन जुदुं जुदुं विचारी अन्य अन्य प्रकारथी
ए लक्षणो कह्यां छे.
ज्यां तत्त्वार्थश्रद्धान लक्षण कह्युं छे त्यां तो आ प्रयोजन छे केजो ए तत्त्वोने ओळखे
तो वस्तुना यथार्थ स्वरूपनुं वा पोताना हितअहितनुं श्रद्धान करे त्यारे मोक्षमार्गमां प्रवर्ते.