३३४ ][ मोक्षमार्गप्रकाशक
ए कारणोने मेळवे, तेमां घणा जीवोने तो सम्यक्त्वनी प्राप्ति थाय ज, कोईने न थाय तो
न पण थाय, परंतु तेणे तो पोतानाथी बने ते उपाय करवो.
ए प्रमाणे सम्यक्त्वनुं लक्षणनिर्देश कर्युं.
प्रश्नः — सम्यक्त्वनां लक्षण तो अनेक प्रकारनां कह्यां छे, तेमां तमे तत्त्वार्थ -
श्रद्धान-लक्षणने ज मुख्य कह्युं तेनुं शुं कारण?
उत्तरः — तुच्छबुद्धिवानने अन्य लक्षणोमां तेनुं प्रयोजन प्रगट भासतुं नथी वा भ्रम
ऊपजे छे तथा आ तत्त्वार्थश्रद्धानलक्षणमां प्रयोजन प्रगट भासे छे तथा कांई पण भ्रम
ऊपजतो नथी, तेथी ए लक्षणने मुख्य कर्युं छे. ए अहीं दर्शावीए छीए —
देव – गुरु – धर्मना श्रद्धानमां तुच्छबुद्धिवानने एम भासे के अरहंतदेवादिकने मानवा,
अन्यने न मानवा — एटलुं ज सम्यक्त्व छे, पण त्यां जीव – अजीवनुं वा बंध – मोक्षना
कारणकार्यनुं स्वरूप भासे नहि तो मोक्षमार्गरूप प्रयोजननी सिद्धि थाय नहि; वा जीवादिनुं
श्रद्धान थया विना मात्र ए ज श्रद्धानमां संतुष्ट थई पोताने सम्यग्द्रष्टि माने, वा कुदेवादि
प्रत्ये द्वेष तो राखे पण अन्य रागादि छोडवानो उद्यम न करे, एवो भ्रम ऊपजे.
वळी स्व – परना श्रद्धानमां तुच्छबुद्धिवानने एम भासे छे के स्व – परनुं जाणवुं ज
कार्यकारी छे अने तेनाथी ज सम्यक्त्व थाय छे. पण त्यां आस्रवादिनुं स्वरूप भासतुं नथी
अने तेथी मोक्षमार्गरूप प्रयोजननी सिद्धि पण थती नथी, वा आस्रवादिनुं श्रद्धान थया विना
मात्र एटलुं ज जाणवामां संतुष्ट थई पोताने सम्यग्द्रष्टि मानी स्वच्छंदी थई रागादि छोडवानो
उद्यम करे नहि, एवो भ्रम ऊपजे.
तथा आत्मश्रद्धानलक्षणमां तुच्छबुद्धिवानने एम भासे के — एक आत्मानो ज विचार
कार्यकारी छे अने तेनाथी ज सम्यक्त्व थाय छे, पण त्यां जीव – अजीवादिना विशेषो वा
आस्रवादिनुं स्वरूप भासतुं नथी अने तेथी मोक्षमार्गरूप प्रयोजननी सिद्धि पण थती नथी,
वा जीवादिना विशेषोनुं अने आस्रवादिना स्वरूपनुं श्रद्धान थया विना मात्र एटला ज विचारथी
पोताने सम्यग्द्रष्टि मानी स्वच्छंदी बनी रागादि छोडवानो उद्यम करे नहि, तेने पण एवो
ज भ्रम ऊपजे छे.
एम जाणी ए लक्षणोने मुख्य कर्यां नहि.
अने तत्त्वार्थश्रद्धानलक्षणमां जीव – अजीवादि वा आस्रवादिनुं श्रद्धान थाय छे, त्यां ते
सर्वनुं स्वरूप जो बराबर भासे तो मोक्षमार्गरूप प्रयोजननी सिद्धि थाय, तथा ए श्रद्धान थतां
सम्यक्त्वी थाय छे पण ए संतुष्ट थतो नथी. आस्रवादिनुं श्रद्धान थवाथी रागादिक छोडी
मोक्षनो उद्यम राखे छे. ए प्रमाणे तेने भ्रम ऊपजतो नथी माटे तत्त्वार्थश्रद्धानलक्षणने मुख्य
कर्युं छे.