Moksha Marg Prakashak-Gujarati (Devanagari transliteration).

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३३६ ][ मोक्षमार्गप्रकाशक
श्रद्धानने परंपरा कारणभूत छे, जोके ते नियमरूप कारण नथी तोपण मुख्यपणे कारण छे
अने कारणमां कार्यनो उपचार संभवे छे, तेथी मुख्यरूप परंपरा कारणनी अपेक्षाए
मिथ्याद्रष्टिने पण व्यवहारसम्यक्त्व कहीए छीए.
प्रश्नःकेटलांक शास्त्रोमां देव-गुरु-धर्मना श्रद्धानने वा तत्त्वश्रद्धानने तो
व्यवहार-सम्यक्त्व कह्युं छे तथा स्वपरना श्रद्धानने वा केवळ आत्माना श्रद्धानने
निश्चयसम्यक्त्व कह्युं छे ते केवी रीते?
उत्तरःदेवगुरुधर्मना श्रद्धानमां तो प्रवृत्तिनी मुख्यता छे; जे प्रवृत्तिमां
अरहंतादिने देवादिक माने अन्यने न माने तेने देवादिकनो श्रद्धानी कहीए छीए. तथा
तत्त्वश्रद्धानमां तेने विचारनी मुख्यता छे; जे ज्ञानमां जीवादितत्त्वोने विचारे छे तेने तत्त्व -
श्रद्धानी कहीए छीए. ए प्रमाणे त्यां मुख्यता होय छे. ए बंने कोई जीवने तो सम्यक्त्वनां
कारण थाय छे परंतु तेनो सद्भाव मिथ्याद्रष्टिने पण संभवे छे तेथी तेने व्यवहारसम्यक्त्व
कह्यां छे.
वळी स्वपरना श्रद्धानमां वा आत्मश्रद्धानमां विपरीताभिनिवेशरहितपणानी मुख्यता
छे. अर्थात् जे स्वपरनुं भेदविज्ञान करे वा पोताना आत्माने अनुभवे तेने मुख्यपणे
विपरीताभिनिवेश होय नहि, तेथी भेदविज्ञानीने वा आत्मज्ञानीने सम्यग्द्रष्टि कहीए छीए.
ए प्रमाणे स्व
परनुं श्रद्धान वा आत्मश्रद्धान सम्यग्द्रष्टिने ज होय छे, तेथी तेने
निश्चयसम्यक्त्व कह्युं.
आ कथन मुख्यतानी अपेक्षाए छे पण तारतम्यपणे ए चारे लक्षण मिथ्याद्रष्टिने
आभासमात्र होय छे तथा सम्यग्द्रष्टिने साचां होय छे. त्यां आभासमात्र छे ते तो
नियमरहित सम्यक्त्वनां परंपरा कारण छे तथा साचां छे ते नियमरूप साक्षात् कारण छे तेथी
तेने व्यवहाररूप कहीए छीए. एना निमित्तथी जे विपरीताभिनिवेशरहित श्रद्धान थयुं ते
निश्चयसम्यक्त्व छे, एम जाणवुं.
प्रश्नःकेटलांक शास्त्रोमां लख्युं छे के‘आत्मा छे ते ज निश्चयसम्यक्त्व
छे, अन्य बधो व्यवहार छे’ते केवी रीते?
उत्तरःविपरीताभिनिवेशरहित श्रद्धान थयुं ते आत्मानुं ज स्वरूप छे. त्यां
अभेदबुद्धिथी आत्मा अने सम्यक्त्वमां भिन्नता नथी तेथी निश्चयथी आत्माने ज सम्यक्त्व
कह्युं, अन्य सर्व सम्यक्त्व तो निमित्तमात्र छे. अथवा भेदकल्पना करतां आत्मा अने सम्यक्त्वने
भिन्नता कहेवामां आवे छे, तेथी अन्य बधो व्यवहार कह्यो छे, एम जाणवुं.
आ प्रकारे निश्चयसम्यक्त्व तथा व्यवहारसम्यक्त्व द्वारा सम्यक्त्वना बे भेद थाय छे.